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धर्म के रास्ते पर चलने वाला हर दुखों से परे रहता है: सीताराम

3 वर्ष पहले
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शहर के शांति भवन आश्रम में आयोजित 21 दिवसीय श्रीमदभागवत कथा के पांचवे दिन रविवार को आश्रम परिसर में हुए भागवत कथा के मौके पर कथावाचक सीताराम शास्त्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच कथा का श्रवण कराते हुए कहा कि वंश और धन शुद्धि के व्याख्यान को लेकर कहा कि शुद्ध कमाई से होने वाले पोषण से बालक भी संस्कारी होता है। इसलिए शुद्धता के साथ होने वाले आय पर ही लोगों को निर्भर रहना चाहिए। कथावाचक शास्त्री ने कहा कि धर्म के रास्ते पर चलने में परेशानी जरूर है। लेकिन धर्म हमेशा सद्ममार्ग पर ही चलाता है। धर्म के चार चरणों से भक्तों को अवगत कराते हुए कहा कि सत्य, दया, तप व शौच हमेशा ही मानव समाज को बुरे मार्ग से बचाता है। जबकि मदिरापान को मानव समाज के लिए बेहद घातक बताते हुए कहा कि कलियुग में मदिरापान के कारण लोग भष्ट्र हो रहे है। इधर भागवत कथा के पांचवे दिन भागवत कथा का श्रवण करने के लिए काफी संख्या में भक्तों की भीड़ आश्रम में मौजूद रही। आश्रम की साध्वी रीता, चैतन्य के अलावा स्वयं सेवक विवेक शर्मा और सुनील कंधवे थे।

प्रवचन देते संत व उपस्थित श्रद्धालु।

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