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आरटीआई की दूसरी अपील के लिए नहीं लगाना होगा सूचना आयोग का चक्कर

3 वर्ष पहले
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सूचना अधिकार में द्वितीय अपील करना अब आसान होगा। इसके लिए अब राजधानी रांची का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। जिला मुख्यालय से ही अपीलकर्ता अपनी बात रख सकेंगे। एक आरटीआई कार्यकर्ता की पहल पर यहां वीडियो कांफ्रेंसिंग की व्यवस्था का आदेश सरकार ने दिया है। झारखंड राज्य सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त आदित्य स्वरूप ने सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गर्वनेंस विभाग के सचिव को इस बाबत पत्र लिख आवश्यक व्यवस्था करने को कहा है। ऑनलाइन वीसी के लिए ई-गर्वनेंस के माध्यम से जिले में पदस्थापित/प्रतिनियुक्त किसी सक्षम तकनीकी कर्मी यथा ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर, नेटवर्क मैनेजर, यूडीआई के डीपीओ की जवाबदेही के लिए डीसी या जिला सूचना पदाधिकारी को निर्देशित करें। हालांकि इसके लिए सरकार ने पहले से तैयारी की थी और एक मोबाइल ऐप से लेकर वीसी की तैयारी भी की थी, लेकिन यह चालू नहीं हो पाया था।

सीएम को पहले लिखा था पत्र फिर मांगा जवाब

शहर स्थित कुटिया रोड के आरटीआई कार्यकर्ता सुनील कुमार खंडेलवाल ने पहले तो सीएम के नाम पत्र लिख कर मांग किया था कि द्वितीय अपील के लिए जिला मुख्यालय में ही वीसी की सुविधा मुहैया कराई जाए। सीएम की तारीफ में कहा सूचना अधिकार कानून का प्रचार हो रहा है जो प्रशंसनीय है। इससे लोगों का रुझान आरटीआई की ओर बढ़ेगा। हाल ही में ऑनलाइन द्वितीय अपील दायर करने के लिए एक पोर्टल का भी उद्धाटन किया है। जिससे लाेगों को सूचना आयोग जाने की जरूरत नहीं है। जिससे लोगों का कीमती समय बचेगा। वर्तमान व्यवस्था में भारी परेशानी होती है, इसलिए वीसी की व्यवस्था की जाए। इस पत्र के बाद सीएम के जन सूचना पदािधकारी से पत्र पर हुई कार्रवाई का जवाब मांगा। जिसके बाद जनसूचना पदाधिकारी के अवर सचिव गोपी कृषण बबलू ने अपीलकर्ता को सूचना दी कि उनके पत्र पर आवश्यक कार्रवाई हो गई है।

क्या होती है समस्या

प्रथम अपील तो जिला मुख्यालय में ही हो जाती है, लेकिन द्वितीय अपील के लिए रांची जाना पड़ता है। इसमें कई अपीलकर्ता समय और खर्च वहन के चलते रांची नहीं जा सकते हैं। अिधकांशत: ऐसा होता है कि अपीलकर्ता पहुंच जाते हैं लेकिन दूसरा पक्ष नहीं पहुंचता है। कई बार दूसरा पक्ष जानबुझ कर नहीं जाता है कि तािक अपीलकर्ता परेशान हो कर आयोग नहीं पहुंचे।

वीसी से अपील की सुविधा का लाभ

जो अपीलकर्ता अार्थिक तंगी और समय के चलते रांची नहीं जा सकते थे, वे जिला मुख्यालय में स्थापित झारनेट या एनआईसी आसानी से पहुंच जाएंगे। उनका समय और पैसा दोनों ही बचेगा। आरइटीआई कार्यकर्ताआंे का मनोबल बढ़ेगा। इससे जिस मकसद से आरटीआई लागू की गई है वह मकसद पूरा होगा। सूचना लेने के लिए अंतिम अपील तक वे जा सकते हैं। इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा।

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