शहर के शांति भवन आश्रम में आयोजित श्रीमदभागवत कथा के 8वें दिन सोमवार को कथावाचक सीताराम शास्त्री ने भगवान कृष्ण व सुदामा के मित्रता पर श्रद्धालुओं के बीच कथा का श्रवण कराया। कथावाचक शास्त्री ने भक्तों के बीच कहा कि सुदामा व कृष्ण के मित्रता ने ही यह सिद्ध किया था, कि बगैर मतलब के भी मित्रता होती है। मतलब की मित्रता कभी सफल नहीं होती। लेकिन इस युग की मित्रता अब झूठ-फरेब पर ही टिकी हुई है। अर्थात, एक-दूसरे से जितना मतलब।
उतना ही मित्रता चल रही है। कथावाचक ने भगवान कृष्ण के हर अवतार से मानव समाज को सीख लेने की बात कही। कहा कि द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने कई आसुरी शक्तियों का वध कर मानव को संकट से उबारा। ऐसे में भगवान कृष्ण से लोगों को यह प्रेरणा जरूरी लेनी चाहिए कि संकट में किसी बेहतर मित्र को देख कर उसे संकट में छोड़ना उचित नहीं। मित्र को संकट में देख कर उसके संकट को दूर करना बुद्धिमान मित्र की पहचान होती है। मौके पर कथावाचक शास्त्री ने द्वापर, त्रेता समेत कई युगों में देवी-देवताओं द्वारा सृष्टि की रक्षा के लिए आसुरी शक्तियों के विनाश को कथा के माध्यम से सुनाया। इधर शांति भवन में 21 दिवसीय श्रीमदभागवत कथा को लेकर नित्यदिन भक्ति के रसवर्षा में श्रद्धालुओं को डूबने का भरपूर मौका मिल रहा है। कथा का श्रवण करने काफी संख्या में आश्रम के श्रद्धालु जुट रहे है।
आयोजन
शांति भवन आश्रम में श्रीमदभागवत कथा के आंठवें दिन बड़ी संख्या में जुटे श्रद्धालु
श्रद्धालुओं के बीच भागवत कथा का श्रवण कराते कथावाचक।