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गैरकानूनी ढंग से ली थी दुकान, चुनाव में भी झूठा शपथ पत्र दिया

3 वर्ष पहले
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गिरिडीह | नगर निगम बोर्ड की पहली बैठक में शहर का मुद्दा गायब हो गया और शिवम ढाबा का आवंटन रद्द होने का मुद्दा छाया रहा। दरअसल, 11 मई को बस स्टैंड स्थित शिवम होटल में भारी मात्रा में शराब का भंडार ग्राहकों के बीच शराब परोसे जाने के बाद उस दुकान का आवंटन रद्द कर दिया गया था। साथ ही दुकान के पुन: आवंटन के लिए टेंडर की तिथि भी निकाल दी गई है। उसके बाद से शहर की राजनीति गरमा गई है। वार्ड पार्षद गोलबंद होने लगे हैं। अप्रत्यक्ष रूप से एसडीएम के फैसले का विरोध कर रहे हैं। छापेमारी के बाद प्रशासन ने होटल को सील कर दिया है। यह दुकान नगर निगम की है। होटल सील की कार्रवाई के बाद एसडीएम सह नगर निगम के कार्यपालक पदाधिकारी विजया जाधव ने 12 मई को उक्त दुकान का आंवटन रद्द कर दी, और 24 घंटे में दुकान खाली करने का नोटिस भी जारी कर दिया।

एसडीएम ने कहा- शिवम ढाबा के संचालक पास आवंटन के कागजात नहीं, पूर्व नप अध्यक्ष दिनेश यादव से सांठगांठ कर किया था हासिल

अब 23 मई को नहीं होगी नीलामी : मेयर

वार्ड संख्या 18 की पार्षद सरिता श्रीवास्तव के बेटे शिवम द्वारा बस स्टैंड में संचालित किए जा रहे ढाबे का आवंटन रद्द कर दोबारा नीलामी की प्रक्रिया पर मेयर सुनील पासवान ने रोक लगा दी है। उन्होंने नीलामी पर रोक मंगलवार को बोर्ड की बैठक में सरिता श्रीवास्तव के रोने पर लगाई। दरअसल बोर्ड बैठक के दौरान ही सरिता श्रीवास्तव चिल्लाकर रोने लगी। उन्होंने कहा कि मैं विधवा हूं। बस स्टैंड स्थित शिवम ढाबा एकमात्र सहारा है। कहा कि ढावा का संचालन पुत्र कर रहा है और दो दिनों पूर्व ननि की कार्यपालक पदाधिकारी ने छापामारी कर इसमें ताला लटका दिया। बाद में इसे खाली करने का फरमान जारी कर 23 मई को नीलाम करने की घोषणा कर दी गई है। सरिता ने कहा कि न्याय नहीं मिला तो दोबारा सदन में पांव नही रखूंगी। इस पर मेयर ने कहा कि मामले में कानूनी सलाह लेकर कोई कार्रवाई की जाएगी। साथ ही मेयर ने आश्वासन दिया कि 23 मई को होने वाली नीलामी फिलहाल नहीं होगी। इस पर सदस्यों ने मेज थप-थपाकर मेयर के फैसले का स्वागत किया।

आमने-सामने

बोर्ड को रोकने का अिधकार नहीं : एसडीएम

एसडीएम सह नगर निगम के कार्यपालक पदाधिकारी विजया जाधव ने दुकान की नीलामी निर्धारित तिथि में हर हाल में होगी। इसे बदलने का बोर्ड को अधिकार नहीं है। मेयर ने ये बातें वार्ड पार्षद सरिता श्रीवास्तव के दबाव में आकर कही है। यह दुकान शिवम श्रीवास्तव या सरिता श्रीवास्तव को आवंटित नहीं किया गया है, क्योंकि उन्होंने इससे संबंधित कोई दस्तावेज कार्यालय में प्रस्तुत नहीं किया है। इस दुकान का उपयोग गैर कानूनी तरीके से उनलोगों द्वारा अगस्त 2014 से अब तक किया जा रहा था। उन पर निगम का 88 हजार रुपए किराया भी बकाया है। सरिता श्रीवास्तव ने निगम चुनाव के नामांकन के दौरान गलत शपथ पत्र दाखिल कर बताया था कि उन पर किसी तरह की देनदारी नहीं है। उन्होंने यह दुकान पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष दिनेश यादव से सांठगांठ कर हासिल की थी। यह पूरी तरह से निजी लाभ के लिए पद के दुरुपयोग का मामला है। कानून की नजर में सभी लोग बराबर हैं। गत दिनों हुई छापेमारी में उस दुकान से भारी मात्रा में शराब का भंडार और होटल में शराब परोसने का काम चल रहा था।

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