सुहाग की लंबी आयु की कामना लिए सुहागिनों ने की वट सावित्री की पूजा
सुहाग के लंबी आयु की कामना का पर्व वटसावित्री के पूजा को लेकर शहर में चहुंओर पूजा-अर्चना का दौर चलता रहा। अहले सुबह से ही सुहागिनों की भीड़ वटवृक्ष (बरगद) वृक्ष के नीचे जुटनी शुरू हो गई थी। इस दौरान जहां कई सुहागिनें अपने सुहाग के साथ पूजा के लिए पहुंची, तो अधिकांश महिलाएं सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना के लिए हाथों में पूजा की थाली लेकर पहुंची। मौके पर वटवृक्ष के नीचे सुहागिनों ने अटूट आस्था के साथ सुहाग के लंबी आयु की कामना लिए वटवृक्ष के चारों और सात परिक्रमा कर मौली सूता बांधी, ओर सुहाग के लंबी आयु का कामना की।
इसे पहले कुमकुम, फल और माता सावित्री के मूर्ति से सजे पूजा की थाली के साथ सुहागिनें वटवृक्ष को कुमकुम, फल, जल व अक्षत से अर्पण की। वहीं पूजा-अर्चना के क्रम में सुहागिनों ने सात परिक्रमा करते हुए मौली सूता से वृक्ष को बांधी, और माता सावित्री के साथ यमराज व वटवृक्ष को ताड़ के पंखे से हवा देकर माता सावित्री, यमराज व वटवृक्ष से सुहाग के लंबी आयु की कामना किया।
पूजा-अर्चना के बाद सुहागिनों ने एक-दूसरे को सिंदूर त्योहार के मान्यताओं को पूरे विधि-विधान के साथ पूर्ण करते हुए पुजारियों से माता सावित्री व सत्यवान के कथा का श्रवण किया। उपवास के साथ किए गए वटसावित्री के पूजा को लेकर नवविवाहिताओं में त्योहार को लेकर उत्साह नजर आया। जहां नवविवाहिताएं हर अनुष्ठान को श्रद्धाभाव के साथ की। कमोबेश, सुहागिनों के आस्था व श्रद्धा के इस त्योहार को लेकर शहर के डीसी आवास स्थित वटवृक्ष, कचहरी शिव मंदिर स्थित वटवृक्ष के अलावे एसडीपीओ आवास समेत शहर के कई वटवृक्ष के समीप सुहागिनों ने सुहाग का लाल जोड़ा धारण कर पूजा-अर्चना की। वटसावित्री की पूजा के बाद सुहागिनों ने घरों में अपने-अपने पति को तिलक लगाकर प्रसाद खिलाकर त्योहार को संपन्न की। इस दौरान शहर के बर तर काली मंडा, पचंबा गौशाला, बोड़ो, अलकापुरी, कचहरी चौक सहित तमाम वटवृक्ष के समक्ष महिलाओं की अहले सुबह से दोपहर तक भीड़ जुटी रही।
वट सावित्री पूजा में सुहागिनें व पूजा करते पंडित।