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रोजगार दिलाने ले गया दिल्ली, अब लौटी तो चल नहीं पाती

3 वर्ष पहले
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गिरिडीह सदर प्रखंड के दो आदिवासी युवतियों को गांव के ही दलाल श्यामल मरांडी ने चार साल पहले दिल्ली के करोलबाग स्थित दो अलग-अल सेठों के यहां बंधक रख दिया। चार साल बाद एक युवती को उसके चाचा ने जब थाना में केस करने की धमकी दी तो श्यामल सप्ताह दिनों बाद युवती को लेकर गिरिडीह लौटा। युवती की हालत बेहद चिंताजनक है और उसने किडनी निकालने का आरोप लगाया है। जानकारी के अनुसार जंगलपुरा का श्यामल मरांडी गांव से दो युवतियों को रोजगार दिलाने के नाम पर लेकर दिल्ली ले गया था। जिसमें एक कैलाश मरांडी की भतीजी सुनीता मरांडी और दूसरी श्याम मरांडी की बेटी रवीना मुर्मू शामिल है। सुनीता मरांडी तो परिजनों के सहयोग से गिरिडीह लौट गई है। लेकिन रवीना मुर्मू अब भी दिल्ली में ही किसी सेठ के यहां बंधक है। जानकारी के मुताबिक रवीना की शारीरिक स्थिति ठीक नहीं रहने के कारण दिल्ली के किसी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इधर घर लौटी युवती सुनीता दोनों पैर से लाचार हो चुकी है। वहीं किडनी के स्थान पर ऑपरेशन के दाग देख आशंका व्यक्त की जा रही है कि उसकी किडनी निकाल ली गई है। इस बात को लेकर परिजन शनिवार को झामुमो नेता सुदिव्य कुमार सोनू से मिले और पूरी कहानी बताई। फिर झामुमो नेता के पहल पर सिविल सर्जन डाॅ राम रेखा सिंह ने युवती का मेडिकल जांच के लिए तीन चिकित्सक की टीम का गठन किया। अस्पताल के सर्जन डाॅ दीपक कुमार, डाॅ संदीप कुमार और डाॅ राजीव कुमार के अगुवाई में युवती का अल्ट्रासाउंड कराया गया। जिसमें यह स्पष्ट हो गया है कि युवती की दोनों किडनी सुरक्षित है। युवती के पीठ की बाईं ओर पीछे के दाग किसी जख्म के है।

अस्पताल में परिजनों के साथ पीड़िता।

दवा खिलाकर रखा बेहोश, फिर दोनों पांव हो गए खराब
श्यामल ने चार साल पहले 2014 में गांव के कैलाश मरांडी की भतीजी सुनीता मरांडी और श्याम मरांडी की बेटी रवीना मुर्मू को दिल्ली में नौकरी दिलाने के नाम पर दिल्ली करोलबाग ले गया। जहां दिल्ली की एक महिला शील से श्यामल की पहचान पहले से थी। श्यामल ने इसी शील महिला को सुनीता मरांडी व रवीना मुर्मू को सौंपा। जहां शील ने सुनीता को करोलबाग के दो अलग-अलग सेठ के यहां नौकरानी के काम में लगा दिया। सदर अस्पताल में इलाज के दौरान शनिवार को सुनीता ने बताया कि जिस सेठ के यहां वह काम करती थी। वह उसके साथ किसी ना किसी बहाने मारपीट करता था। सुनीता ने कहा चार सालों तक परिजनों से बात तक नहीं करने दी गई। कहा कि कभी कपड़े साफ करने तो कभी घर की सफाई को लेकर उसे प्रताड़ित करता था। एक दिन सर दर्द होने लगी तो ऐसा दवा दिया कि वह दो दिनों तक बेहोश रही। उसके बाद दोनों पांव काम करना बंद कर दिया। ना तो वह चल सकती थी, और ना ही वह बैठ सकती थी। सुनीता को वेतन भी कभी नहीं दिया गया। वेतन श्यामल ले लेता था।

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