कृषि मंडी में पीने का पानी नहीं, किसान हो रहे परेशान
गल्लामंडी में किसानों को पानी पिलाते कर्मचारी।
गोहद मंडी में कर्मचारी टैंकरों से किसानों को पिला रहे पानी
भास्कर संवाददाता | गोहद
कृषि उपज मंडी गोहद में इन दिनों अनाज की आवक बढ़ने से बड़ी तादात में किसान पहुंच रहे हैं, लेकिन किसानों को मंडी में मूलभूत सुविधाओं से जूझना पड़ रहा है। एक तरफ मंडी में किसानों को अनाज विक्रय में परेशानी हो रही है तो, वहीं सबसे बड़ी किल्लत पानी की है। मंडी में लगा बड़ा बोर ठप होने से किसान व व्यापारियों के साथ मंडी कर्मचारी भी पानी के संकट का सामना कर रहे हैं। हालांकि मंडी सचिव लोकेंद्र सिंह द्वारा किसानों की प्यास बुझाने के लिए टैंकर मंगाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं कुछ कर्मचारी किसानों को उनके वाहनों पर ही मग्गा से पानी पिलाने का काम कर रहे हैं, मगर इन सभी के बावजूद मंडी में पानी का भीषण संकट बढ़ता जा रहा है।
450 फीट गहरा बोर फैल
मंडी में पानी की सुविधा के लिए कुल तीन बोर लगाए गए हैं, जिनमें दो छोटे बोर पूर्व में जलस्तर गिरने से फेल हो चुके हैं। जिसके बाद मंडी में लगे 450 फीट गहराई वाले बोर से पानी की सप्लाई दी जा रही थी। लेकिन अधिक जलस्तर गिरने से इस बोर ने भी साथ छोड़ दिया है। मंडी सचिव श्री तोमर ने बताया कि मंडी बोर्ड की बैठक में उन्होंने नए बोर खनन के लिए प्रस्ताव रखा, जो पारित भी हो चुका है। मगर सचिव का कहना है कि हाल ही के दिनों में मंडी के पास एक 450 फीट तक गहराई में बोर का खनन कराया गया था, जिसमें पानी नहीं मिला है। ऐसी स्थिति में पहले मंडी में भूमि परीक्षण कराया जाएगा, जिसके बाद भी नए बोर का सफलतापूर्वक खनन किया जाएगा।
कर्मचारी पिला रहे पानी
भीषण गर्मी में कड़ी धूप से घंटों तपने वाले किसानों को राहत दिलाने के लिए मंडी कर्मचारियों ने बीड़ा उठाया है। सचिव द्वारा प्राइवेट बोरों से 2 टैंकर शीतल जल के मंगाए जा रहे हैं। जिसके लिए मंडी के दो कर्मचारी तैनात किए गए हैं, जो किसानों को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर ही पानी पिलाने का काम कर रहे हैं। इस सुविधा से किसानों को अधिक राहत महसूस हो रही है। किसानों का कहना है कि मंडी में कहीं भी पानी की सुविधा नहीं है। किसानों के साथ अनाज बेचने व खरीदारी के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से बच्चे व महिलाएं भी आ रही हैं, जिन्हें पानी की अधिक आवश्यकता होती है। इस स्थिति में कर्मचारियों द्वारा उन लोगों तक भी पानी पहुंचाया जा रहा है।