गोमिया उपचुनाव में जीत का दावा कर रहे तीनों राजनीतिक दल भाजपा, जेएमएम और आजसू विकास धुन गाने में मग्न हैं। विकास के प्रति अपने समर्पण और आइडिया को श्रेष्ठ बताते हुए तीनों कह रहे हैं - विकास का हमारा रंग चटख है, उनका रंग धीमा। चुनाव प्रचार के दूसरे चरण में भी यहां कास्ट पॉलिटिक्स पर डेवलपमेंट कार्ड भारी पड़ रहा है। हालांकि कास्ट फैक्टर बिल्कुल हाशिए पर है, ऐसा भी नहीं है। अपने-अपने हिसाब से सभी इसका बखूबी इस्तेमाल भी कर रहे हैं, पर चुनाव प्रचार के दौरान यह विषय नेपथ्य में ही रहता है। इस बीच एक-दूसरे के कार्यकर्ताओं को तोड़ने का भी खेल जारी हो चुका है। गाड़ियों पर चुनावी झंडे बदलने लगे हैं। अगर इन झंडों के साथ निष्ठाएं भी बदल जाएं, तो चुनावी नतीजा रोचक हो जाएगा।
बदलने लगे हैं गाड़ियों पर चुनावी झंडे
भाजपा का नारा विकास किया है, विकास करेंगे
भाजपा का नारा है - विकास किया है, विकास करेंगे। प्रचार में पार्टी प्रत्याशी माधव लाल सिंह दावा करते हैं - है कोई माई का लाल, जो मेरी ईमानदारी पर सवाल खड़े। पार्टी नेताआें का कहना है कि राज्य में बीजेपी सरकार है। गोमिया से भाजपा विधायक होगा तो यहां का विकास कार्य और भी तेज होगा।
मजबूत पक्ष : सीएम ने दौरों से भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की। प्रदेश संगठन महामंत्री से लेकर वरीय नेता मौजूद।
जेएमएम का नारा अधूरा रह गया विकास पूरा करेंगे
जेएमएम का नारा है - अधूरा रह गया विकास पूरा करेंगे। चुनाव प्रचार में पार्टी प्रत्याशी बबिता देवी कहती हैं - विरोधियों ने हमारे पति योगेंद्र महतो को झूठे मुकदमे में फंसा कर सजा करा दी, ताकि क्षेत्र का विकास न होने पाए। अब जब घर से निकल चुकी हूं तो आप सबके सपने पूरा कर के रहूंगी। साढ़े तीन साल में विकास की गति तेज हुई है। अधूरे पड़े सभी काम पूरा करना है।
आजसू का नारा हमारा ध्येय तेजी से करेंगे क्षेत्र का विकास
आजसू का नारा है - हमारा ध्येय विकास। पार्टी प्रत्याशी लंबोदर महतो दावा करते हैं - हमने गोमिया के विकास के लिए अपनी सरकारी नौकरी छोड़ी है। सरकारी अधिकारी होने के नाते 100 करोड़ की विकास योजनाएं पूरी कराई हैं। आजसू का दावा है कि लंबोदर के जीतने से क्षेत्र में नए तरीके से विकास की गति तेज होगी।
मजबूत पक्ष : करीब ढाई साल पूर्व से ही क्षेत्र में सक्रिय। जल संसाधन मंत्री के साथ होने से क्षेत्र मेंे विकास की कई योजनाएं शुरू
गोिमया-सिल्ली उप चुनाव
मजबूत पक्ष : गठबंधन में शामिल पार्टियां कांग्रेस, झाविमो, राजद और वाम दल के नेता संयुक्त रूप से चुनाव प्रचार कर रहे हैं।
सिल्ली में कर रहेे सुदेश सीधा संवाद, खामियां गिना रहीं सीमा
जीतेंद्र कुमार | रांची
सिल्ली विधानसभा उप चुनाव में आजसू पार्टी के अध्यक्ष सह प्रत्याशी सुदेश कुमार महतो जहां मतदाताओं को समझाने में जुटे हैं वही प्रतिद्वंदी झामुमो की सीमा महतो सरकार की खामियां गिनाने में लगी हैं। चुनाव प्रचार के दौरान सुदेश महतो वोटरों से सीधा संवाद कर रहे हैं। हर उस गांव में जा रहे हैं जहां मतदान के लिए बूथ बनाया गया है। मतदाताओं को समझाना, उन्हें विश्वास दिलाना शुरू किया है कि अब वह उनके सीधे संपर्क में रहेंगे। बीच में न तो कोई बिचौलिया होगा और न ही तीसरा व्यक्ति। उनसे मिलने के लिए बीच में कोई तीसरा व्यक्ति नहीं आएगा। विकास के सारे काम अब समूह के लोग ही करेंगे। इस क्रम में उन्होंने मतदाताओं को पिछले 15 साल से क्षेत्र के लोगों के लिए किए गए कार्यों को भी बताना शुरू किया है।
वहीं सीमा महतो जनता को समझा रही है कि उनके पति के साढ़े तीन साल के कार्यकाल में विकास की योजनाएं इसलिए नहीं गति पकड़ी क्योंकि सरकार एनडीए की रही। एक पदाधिकारी के साथ हुए बकझक में उनके पति को सबने मिल कर फंसाया। सुदेश महतो सिल्ली के लिए किए गए विकास काम को अपने चुनाव प्रचार का आधार बना रहे हैं तो सीमा महतो पति अमित महतो को मिली सजा को सहानुभूति की लहर में तब्दील करने में लगी है। विपक्षी दलों की एकजुटता सीमा का साहस बढ़ा रहा है।
आजसू सुप्रीमो पूर्व में किए गए विकास काम को बता रिझा रहे पति को मिली सजा को सहानुभूति में बदलने में जुटी हैं सीमा
दोनों का विकास करने का दावा
आजसू समर्थकों ने कहना शुरू किया सुदेश महतो जीतेंगे तो मंत्री बनेंगे
सुदेश के पक्ष में प्रचार के क्रम में आजसू पार्टी के नेता- कार्यकर्ता ने यह भी कहना शुरू किया है कि चुनाव जीते तो सुदेश महतो राज्य सरकार में मंत्री बनेंगे। साढ़े तीन साल में नहीं हुए विकास के कार्यों को वह डेढ़ साल में पूरा करेंगे। जनता की हर जरूरी आवश्यकताओं को पूरा कराएंगे।
झामुमो अपने तय रणनीति के तहत कर रहा प्रचार, केंद्र में आदिवासी-मूलवासी
सिल्ली में झामुमो तय रणनीति के तहत प्रचार कर रहा है। उसके प्रचार के केंद्र में आदिवासी-मूलवासी है। सीएनटी और एसपीटी एक्ट में संशोधन के माध्यम से रैयतों से जमीन हड़पने को वह मुद्दा बना रहा है। राज्य सरकार के विकास के दावों का वह पोल खोलने में जुटा है। झामुमो के नेता मतदाताओं को यह भी बताने की कोशिश में लगे हैं कि राज्य सरकार, जिसमें आजसू भी बराबर की हिस्सेदार रही है, झारखंड के मूलवासियों-आदिवासियों की हितैषी नहीं है। स्थानीय नीति हो या नियोजन नीति इसमें झारखंडी हितों का ध्यान नहीं रखा गया।