कापसी में खजूर पेड़ पर चढ़कर निभाई भांगा रस्म
बंग समाज द्वारा चरक पूजा महोत्सव का आयोजन पारंपरिक रिवाजों के साथ किया जा रहा है। इसके तहत कापसी में खजूर भांगा पूजा अनुष्ठान का आयोजन शुक्रवार को किया गया। इसमें शिव भक्त मंत्र उच्चारण कर खजूर पेड़ में चढ़ते हैं तथा पेड़ के ऊपर नृत्य किया करते हैं।
गत वर्ष खजूर भांगा के दौरान पीवी 21 में हादसे होने से एक शिवभक्त की मौत हो गई थी। हादसे को देखते इस वर्ष लंबे खजूर पेड़ में चढ़ने के बजाए छोटे पेड़ पर चढ़ कर अनुष्ठान पूरा किया गया।
इस अनुष्ठान को करने वालों को चैत्र माह में पूरे एक महीने संन्यास धारण करते पारंपरिक वेशभूषा में भिक्षा मांग एक पहर भोजन ग्रहण करना होता है। खजूर भांगा महोत्सव का इंतजार लोग बेसब्री से करते हैं। शिवभक्त की टोलियों में 2 सदस्य गंगा जल से स्नान कर गेरुआ वस्त्र धारण कर कटीले खजूर पेड़ में बिना किसी सहारे चढ़ते हैं तथा नृत्य करते हुए पेड़ पर लगी कच्चे खजूर की डालियों को तोड़ नीचे फेंकते हैं। नीचे खड़े श्रद्घालु ऊपर से फेंके खजूर फल को प्रसाद के रुप में ग्रहण करते हैं। यह दिन शिवभक्तों का भिक्षा मांगने का आखिरी दिन होता है।
प्रथा
बंग समाज द्वारा चरक पूजा महोत्सव का आयोजन पारंपरिक रिवाजों के साथ किया जा रहा
सांकेतिक रूप में मनाएंगे चरक पर्व
सुरक्षा की दृष्टि से समाज द्वारा लोहे की हुक पीठ में फंसाकर घूमने पर प्रतिबंध लगाया है। शिव भक्त परंपरा को बनाए रखने सांकेतिक रूप से चरक पर्व मनाएंगे। इस महोत्सव को देखने दूरदराज ग्रामीण इलाकों से लोग कापसी पहुंचते हैं।
इस वर्ष कम ऊंचाई के खजूर पेड़ में चढ़ पुरी की गई खजूर भांगा की रस्म।