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पहले पी रहे थे झिरिया का पानी, अब लगा हैंडपंप

3 वर्ष पहले
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पखांजूर| कोयलीबेड़ा ब्लॉक के गोंडाहूर क्षेत्र के ग्राम पीवी 52 से लगे ग्राम मरकाहुर में नल न होने के कारण ग्रामीण गांव में बने झरिया का पानी पी रहे थे। इस बात की जानकारी जब क्षेत्र के सांसद विक्रमदेव उसेंडी को लगी तो उन्होंने अधिकारी को गांव की समस्या को देखते हुए हैंडपंप खनन कराने के निर्देश दिए। इसके चलते महज 15 दिनों में ही गांव में हैंडपंप का खनन हो गया।

ग्राम मरकाहुर के आदिवासी परिवार ने अपने गांव को छोड़ गांव से करीब तीन किलो मीटर दूर अलग बस्ती बसा ली है। ऐसे में इस नई बस्ती में न ही सड़क और बिजली की कोई समुचित व्यवस्था है और न ही पीने के पानी के लिए कोई हैंडपंप की व्यवस्था। गांव में खोदा गया छोटे से गड्ढे में ही पानी आ जाता है और इसी पानी से पूरे ग्रामीण निस्तार करते हैं। 6 मई को इस गांव में पानी की समस्या को लेकर पखांजूर के एक अधिकारी ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया में डाली। इस वीडियो में दिखाया गया कि किस तरह उस गांव के ग्रामीण झरिया के पानी को पीने के लिए उपयोग कर रहे हैं। उस ग्रुप में कई भाजपा नेता भी जुड़े हुए थे, जिन्होंने सांसद विक्रमदेव उसेंडी को बताया। इसके बाद सांसद ने हैंडपंप खनन के निर्देश दिए और आज गांव में हैंडपंप का खनन किया जा रहा है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के एई पीएन पाल ने बताया गांव में हैंडपंप खनन के लिए विभाग ने बोर खनन गाड़ी भेज दी है।

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