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मानव मन को सद्भक्ति के मार्ग पर मिलती है पवित्रता: शास्त्री

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | गोरमी/ऊमरी

मानव मन को सद्भक्ति के मार्ग पर पवित्रता मिलती है। जब धर्म पर प्रहार होता है तो साधु-संतों की आत्माओं पर प्रहार किया जाता है। ऐसे महापुरुषों की रक्षा के लिए भगवान अवतार लेते हैं। यह कथा गोरमी के वार्ड आठ स्थित थापक मोहल्ला में पंडित महेश शास्त्री ने कही। शास्त्री ने श्रद्धालुओं को बताया व्यक्ति को जीवन भर कर्म धर्म के लिए प्रय| करना चाहिए। जो व्यक्ति मोह माया को त्यागकर प्रभु की चरणों में पहुंच जाता है, उसका उद्धार निश्चित है। उन्होंने बताया भगवान कृष्ण ने बाल्यावस्था से दुराचारियों व राक्षसों का विनाश किया, परंतु कभी धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा। उन्होंने गीता में अर्जुन को संदेश दिया कि धर्म के लिए किया गया युद्ध भी नैतिकता का पाठ पढ़ाता है।

परमार्थ के लिए करें चिंतन

उधर ऊमरी के गेहवत गांव में चल रही श्रीमद भागवत कथा के तीसरे दिन पंडित सुनील शास्त्री ने कहा व्यक्ति को परमार्थ के लिए चिंतन करना चाहिए। कई वेदनाओं से घिरा मनुष्य अपना विवेक खो बैठता है, ऐसे में प्रभु का स्मरण ही उसे सही मार्ग और दिशा देता है। उन्होंने बताया संसार में अनन्य भक्त हुए जिन्होंने प्रभु की आराधना के बाद घोर कष्ट सहन किए, परंतु अंत में उन आत्माओं को परमात्मा का सहारा मिला। संकटों से घिरे मनुष्य को प्रभु स्मरण से शांति मिल जाती है। मगर कलयुगी संसार में व्यक्ति का भगवान से भरोसा उठ रहा है। वह अपनी ताकत व धन के घमंड में इतना चूर हो चुका है कि जीवन भर पाप के घंघोर जाल में उलझकर रह जाता है। जिसके कारण वह अपने जीवन के उद्देश्य से विमुख हो जाता है।

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