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मुख्यमंत्री सिद्दारमैया बादामी सीट से 1,696 वोटों से जीते, चामुंडेश्वरी

3 वर्ष पहले
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मुख्यमंत्री सिद्दारमैया बादामी सीट से 1,696 वोटों से जीते, चामुंडेश्वरी 36,042 वोट से हारे

भाजपा के सीएम प्रत्याशी येद्दियुरप्पा शिकारीपुरा से आठवीं बार जीते।

जेडीएस नेता कुमारस्वामी अपनी दोनों सीटें जीतने में कामयाब रहे।

कांग्रेस का वोट 1.3% बढ़ा, पर सीटें पिछली बार से आधी हो गईं।

30 मंत्री मैदान में थे। 16 हारे, 14 जीते।

मुस्लिम बहुल 23 सीटों में से 9 पर भाजपा, 12 पर कांग्रेस और 2 पर जेडीएस जीती।



कर्नाटक में क्षेत्र, जाति और बातों से कैसे मिले वोट, भाजपा कैसे बनी सबसे बड़ी पार्टी...

33 साल का इतिहास बरकरार; कर्नाटक में जिसकी सरकार, उसे बहुमत नहीं

अटका कर्नाटक

सबसे बड़ी पार्टी भाजपा को रोकने के लिए दूसरे नंबर की कांग्रेस ने तीसरे नंबर की जेडीएस को समर्थन दिया

भास्कर न्यूज | बेंगलुरू/नई दिल्ली

चुनाव पूर्व अनुमानों के अनुसार कर्नाटक की जनता ने खंडित जनादेश दिया है। मंगलवार को घोषित नतीजों में भाजपा सबसे बड़ा दल तो बनी, लेकिन बहुमत से 8 सीट पीछे रह गई। दूसरे नंबर पर रही कांग्रेस ने तेजी से फैसला लेकर भाजपा की रणनीति से ही उसे अटका दिया। तीसरे नंबर पर रहकर किंगमेकर बनने का सपना देख रही जेडीएस को कांग्रेस ने बिना शर्त समर्थन दे दिया। जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने तुरंत ऑफर स्वीकार किया और सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया। भाजपा ने भी दावा पेश किया है।

गोवा, मणिपुर और मेघालय में कांग्रेस सबसे बड़ा दल बनकर भी सरकार नहीं बना पाई थी।

तस्वीर 14 मई 1996 की। जनता दल ने देवेगौड़ा को प्रधानमंत्री पद के लिए चुना था।

22 साल पहले 46 सांसदों वाली पार्टी के नेता देवेगौड़ा कांग्रेस के समर्थन से प्रधानमंत्री बने थे

अब 38 विधायकों वाले देवेगौड़ा के बेटे कुमारस्वामी कर्नाटक के सीएम बन सकते हैं

यूनाइटेड फ्रंट ने 1996 में एचडी देवेगौड़ा के नेतृत्व में सरकार बनाई थी। कांग्रेस ने फ्रंट को समर्थन दिया था। बाद में समर्थन वापस लेने से सरकार गिर गई थी।

तब कैसे पीएम बने थे देवेगौड़ा: यूनाइटेड फ्रंट-192 कांग्रेस-140

फ्रंट के घटक दल: नेशनल फ्रंट- 79

जनता दल- 46 सपा- 17 टीडीपी- 16 लेफ्ट फ्रंट- 52 अन्य दल-61

राजभवन में राजनीति

कांग्रेस ने राज्यपाल को दिखाया गोवा पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, कहा- सबसे बड़े दल को शपथ जरूरी नहीं: कांग्रेस ने गोवा पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला राज्यपाल को दिखाया। कोर्ट ने कहा था, \\\"सबसे बड़े दल को शपथ दिलवाना जरूरी नहीं। 2-3 दलों के पास ज्यादा संख्या है तो उन्हें शपथ दिलवा सकते हैं।\\\' कांग्रेस ने कहा- राज्यपाल इसके खिलाफ नहीं जा सकते।

जेडीएस ने कहा- कांग्रेस का प्रस्ताव मंजूर, कुमारस्वामी मुख्यमंत्री होंगे, 18 मई को शपथ लेंगे, दावा भी पेश किया

कर्नाटक में सरकार बनने के दो फॉर्मूले

फॉर्मूला 1 कांग्रेस+जेडीएस+अन्य यानी (78+38+1=117)

आंकड़े बहुमत से ज्यादा हैं। लेकिन यह चुनाव के बाद का गठबंधन है। ऐसे में राज्यपाल पर कोई संवैधानिक या नैतिक दबाव नहीं है कि इस गठबंधन को ही पहला मौका दें।

फाॅर्मूला 2 भाजपा+जुटाए विधायक यानी (104+8=112)

भाजपा को कम से कम आठ विधायकों की जरूरत है। एेसे में कांग्रेस या जेडीएस से कम से कम आठ विधायक तोड़ने होंगे। सबसे बड़े दल के नाते राज्यपाल ने भाजपा को न्योता दिया तो उसे बहुमत जुटाने के लिए मोहलत मिल जाएगी।

पहली बार कांग्रेस ने भाजपा को उसी की रणनीति से घेरा

भाजपा बाेली- जनादेश हमारे लिए, सरकार तो हम ही बनाएंगे

...और एक संभावना ऐसी भी हो सकती है

इन दो फॉर्मूलों के अलावा एक तीसरी स्थिति भी संभव है। न्योता मिलने के बाद भी भाजपा बहुमत साबित करने में नाकाम रही तो कांग्रेस-जेडीएस काे गैर भाजपा सरकार बनाने का मौका मिल सकता है।

अब दारोमदार राज्यपाल वजुभाई के हाथों में

राज्यपाल वे, जिन्होंने मोदी के लिए कभी अपनी सीट छोड़ी थी

सरकार किसकी बनेगी, यह इस पर निर्भर है कि राज्यपाल वजुभाई वाला किसे न्योता देंगे। नरेंद्र मोदी के गुजरात में सीएम के तौर पर 13 साल के कार्यकाल में वजुभाई वाला 9 साल तक वित्त मंत्री थे। 2001 में मोदी के पहले विधानसभा चुनाव के लिए वजुभाई ने राजकोट सीट छोड़ दी थी।

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