उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिला निवासी हसीन उर्फ बंटी की साइकिल ही जिंदगी है। साइकिल ही उसके जीने का साधन है। उसने अपनी जिंदगी साइिकल के नाम कर रखी है। वह साइिकल पर चलता, उठता व बैठता है। और तो और वह साइिकल पर ही सोता है। साइिकल पर सवार होकर ही खाता-पीता भी है। साइिकल और वह एक-दूसरे के पर्याय हैं। साइिकल के सहारे ही उसकी जिंदगी चल रही है। ऐसा नहीं कि वह दिव्यांग है और साइिकल के सहारे चलता है। वह पूर्ण रूप से स्वस्थ है। परंतु पिछले 15 सालों से साइिकल ही उसका साथी है और आजीविका भी। वह दिन भर आराम करने से लेकर भोजन तक सारा काम साइिकल पर ही करता है और हर शाम वह साइिकल पर ही खेल दिखाता है। उसके खेल का नाम साइिकल सर्कस है। उसकी साइिकल बिना ब्रेक की है। इस खेल में उसे महारथ हासिल है। उन दिनों वह आसनबनी-2 पंचायत में अपना पड़ाव डाला है और यहां के विभिन्न गांवों में साइिकल सर्कस का प्रर्दशन कर रहा है। इस एवज में उसे प्रतिदिन पांच से छह सौ रुपए की कमाई हो जाती है। मेले व अन्य बड़े आयोजनों में अधिक कमाई होती है। बिना ब्रेक वाली साइिकल पर सवार होकर वह एक से एक करतब दिखाकर वह लोगों को हैरत में डाल देता है। साइिकल पर सवार होकर ट्यूब लाइट फोड़ना, भारी सामान दांत से खींचना, जमीन पर गिरा नोट उठा लेना, नृत्य करना, साइिकल पर चलते हुए अपने सिर पर दूसरी साइिकल उठा लेना, अपने सहयोगी को कंधे पर लेकर तेज गति से साइिकल चलाना आदि उसकी फितरत है। इन सभी करतबों में वह कभी भी अपना पैर जमीन पर नहीं रखता है।
बिना ब्रेक वाली साइकिल से कर चुका है कई हैरतअंगेज कारनामे
शहर से ज्यादा गांवों में लोग उसके खेल अधिक देखते हैं
उसके पैर साइिकल के पैडल से नीचे कभी नहीं उतरते हैं। वह एक से एक हैरतअंगेज कारनामे दिखाकर दर्शकों को चकित कर देता है। वह सालोंभर पूरे भारत का चक्कर काटता रहता है। प्राय: बड़े मेलों में वह अपना करतब दिखा चुका है। उसके साथ जोकर जहीर, उदघोषक सहजाद व नर्तक काजल भी रहते हैं। सभी की आजीविका साइकिल के खेल पर ही टिकी है। उसने बताया कि इस माह वह गोविंदपुर के ही विभिन्न गांवों में खेल दिखाएगा। उसका कहना है कि शहरों की अपेक्षा गांवों के लोग उसके खेल को अधिक पसंद करते हैं। मान-सम्मान भी देते हैं। गांवों में उन्हें खाने की भी समस्या नहीं आती। कभी इसके घर तो कभी उसके घर मुफ्त खाना मिल जाता है।