कोलकाता वेयर इंडस्ट्रीज की पानी फैक्ट्री की ईंट तक चुरा ले रहे हैं चोर
गरीब-गुरबा और मध्यम वर्ग की गाढ़ी कमाई के पैसे को ढाई से तीन वर्षों में दुगुना करने का दावा कर कोलकाता वेयर इंडस्ट्रीज नामक नॉन-बैंकिंग कंपनी लोगों से जमकर निवेश करवाया। आमजनों को झांसा देने के लिए निरसा के चोपड़ा कॉलोनी मोड़ एनएच-2 के समीप वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का भी निर्माण करवाया। जिसके बाद लोगों ने और भी ज्यादा निवेश किए। परन्तु प्रशासन द्वारा नन-बैंकिंग कंपनियों को सील किए जाने व पदाधिकारियों पर नामजद प्राथमिकी दर्ज होने के बाद सभी फरार हो गए। जिसके बाद कोलकाता वेयर इंडस्ट्रीज के सभी सामग्रियों को चोर आराम से अपने से साथ ले जा रहे है। लुटते नॉन-बैंकिंग कंपनियों की संपत्ति के कारण अब निवेशकों के पैसे वापसी की आस अधर पर लटकता नजर आ रहा है।
कब और कैसे आई कोलकाता वेयर इंडस्ट्रीज
निरसा के महताडीह निवासी रतन कुमार भुईंया उर्फ रतन कुमार ने अपने गरीबी व फटे हाल को सुधारने के लिए वर्ष 2010 में कोलकाता वेयर इंडस्ट्रीज नामक नन-बैंकिंग कंपनी का कार्यालय निरसा में खोला। लोगों से ज्यादा निवेश करवाने को लेकर चोपड़ा कॉलोनी मोड़ में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी खोला। जिसके उद्घाटन समारोह कई बुद्धिजीवियों के साथ बॉलीवुड स्टार भी पहुंचे थे तथा जीवन जल को बाजार में बेचा जाने लगा। जिसके बाद से लोगो ने जमकर उक्त कंपनी में निवेश किया। जानकारों के अनुसार निरसा व गोविंदपुर के लोगो ने एक सौ करोड़ से अधिक निवेश किए। निवेश को लेकर जमकर कमीशनखोरी भी उफान पर रही। अभिकर्ताओं द्वारा एक लाख रुपए निवेशकों का निवेश करने मात्र से एक बाइक कंपनी द्वारा दी जाती थी।
अबतक प्लांट के जब्ती को लेकर कोई कार्रवाई नहीं
5 वर्षों के फरारी के बाद रतन का पहुंचा शव
न्यायालय के निर्देश पर सीआईडी विभाग ने 25 फरवरी 2013 को निरसा स्थित कोलकाता वेयर इंडस्ट्रीज के कार्यालय को सील कर दिया। जिसके बाद रतन कुमार सहित कइयों को आरोपी बनाया गया। प्रशासन द्वारा किए गए करवाई के बाद रतन निरसा से फरार हो गए। परन्तु रतन का कई हाइवा, महंगी कारें व वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर कोई करवाई नहीं हुई। 20 मई 2015 को न्यायालय के निर्देश पर सीआईडी विभाग द्वारा रतन के घर की कुर्की भी हुई। परन्तु रतन का कोई अता-पता नहीं चला। परिजन उसके बारे में कुछ भी पता नहीं होने के दावे करते रहे। स्वयं नन-बैंकिंग कंपनी का निदेशक होने के बावजूद रतन अपने व अपनी प|ी के नाम से लाखों रुपए का निवेश निरसा डाक घर में किए थे। 13 जुलाई 2017 को रतन व उनकी प|ी डाक घर पहुंच पैसे निकासी का भी प्रयास किया।
गेट से खिड़की तक कुछ नहीं बचा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का
चोपड़ा कॉलोनी स्थित कोलकाता वेयर इंडस्ट्रीज के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के सब कुछ लूट गया। प्लांट में लगे मोटर, महंगी मशीनें, खिड़की और दरवाजे तक नहीं बचा। वही मुख्य द्वार पर लगा बड़े गेट को भी चोरों ने गैस कटर से काट लेते गए।करोड़ों के इस प्लांट में अब ईंट के ढांचा को छोड़ कुछ नहीं बचा। निरसा के आमजनों का एक सौ करोड़ रूपया पर चोर अपना हाथ साफ कर गए। परन्तु लोगों में यह सबसे बड़ा सवाल है कि, कुर्की जब्ती के बावजूद रतन के महंगी वाहनों व प्लांट पर करवाई क्यों नहीं हुआ। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि एक गिरोह सामानों को बेचने का काम कर रहे हैं। जो प्लांट के जमीन को बेचने के लिए सभी सामानों को एक-एक कर उखाड़ बेच रहा है। अगर समय रहते इस पर करवाई नहीं हुई तो प्लांट के जमीन तक को बेच दिया जाएगा और निवेशक मुंह ताकते रह जाएंगें।
लूट गया सब संपत्ति
रतन कुमार के शव आने के बाद पांच वर्षों के फरारी पर पर्दा उठा। रतन अपने परिवार के साथ प. बंगाल के रानीगंज स्थित अपने परिजन के घर रहता था। वहीं कुर्की जब्ती में भी खानापूर्ति हुई। कुछ कुर्सी व टेबुल को छोड़ कोई महंगी सामग्रियों का जब्ती नहीं हुआ। रतन के महंगे कार, हाइवा व वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।