कोबरा के जवानों ने संभाला मोर्चा, नक्सलियों को घेरा
हेलीकॉप्टर से उतरते कोबरा के जवान।
भास्कर न्यूज| चक्रधरपुर
सारंडा कोल्हान वन प्रमंडल के सीमा क्षेत्र में गहन घनघोर जंगल है। यहीं पर भाकपा माओवादियों की बैठक थी। इसी बैठक से पहले पुलिस व माओवादियों का मुठभेड़ रविवार की सुबह हो गई है। माओवादियों के बैठक का मकसद पुन: सारंडा पोड़ाहाट, कोल्हान इलाके में अपनी पैठ को मजबूत करना है। लेकिन पुलिस भी इस घेराबंदी को अंजाम तक ले जाना चाहती है। रविवार की सुबह मुठभेड़ के बाद चार पांच हेलीकॉप्टर से कोबरा बटालियन के कमांडों को जंगल में उतार दिया है। कोबरा के कमांडों रात अंधेरे में भी जंगल युद्ध चला सकते हैं। उन्हें जंगल वार की स्पेशल ट्रेनिंग दी गई है। माना जा रहा है कि गोइलकेरा थाना क्षेत्र के सांगाजाटा व गुवा थाना क्षेत्र के रोवाम के बीच वाले इलाके में माओवादियों के शीर्षस्थ नक्सली नेता मौजूद हैं। जिनके साथ 40 से ज्यादा हथियारबंद माओवादी गुरिल्ला लड़ाके भी हैं। पलामू के बुढ़ा पहाड़ में मुख्य नेता अरविंद जी के मारे जाने के बाद यहां पहली बार बड़ी बैठक की तैयारी थी। कोल्हान व सारंडा वन प्रमंडल के बीच चल रहे ऑपरेशन के बारे कोई अधिकारी कुछ भी नहीं बता रहा है। लेकिन रविवार दोपहर को ऑपरेशन में कोबरा जवानों को शामिल किए जाने से ये उम्मीद की जा रही है कि निर्णायक लड़ाई होगी। वहीं गुवा, किरीबुरू,छोटा नागरा के अलावे गोइलकेरा की ओर से जवानों की घेराबंदी की गई है।
हेलीकॉप्टर से सोनुवा पहुंचे अधिकारी व जवान
सोनुवा| गोईलकेरा के संगाजाटा बोराई जंगल के पास सर्च ऑपरेशन के दौरान पुलिस एवं नक्सलियों के बीच हुए मुटभेड़ को लेकर रविवार को सोनुआ में भी पुलिस व सीआरपीएफ की सक्रियता बनी रही। इस मामले को लेकर पोड़ाहाट डीएएसपी सकलदेव राम रविवार की सुबह सोनुआ थाना पहुंचे। दूसरी ओर दोपहर करीब डेढ़ बजे वायुसेना के हैलीकॉप्टर भी सोनुवा स्टेडियम में उतरा। मिली जानकारी के मुताबिक इस हैलीकॉप्टर से कोबरा बटालियन के जवान सोनुवा पहुंचे। उसके बाद लगभग ढाई बजे और एक हैलीकॉप्टर भी सोनुवा स्टेडियम में उतरा। इस हैलीकॉप्टर से सीआरपीएफ या कोबरा बटालियन के पदाधिकारी पहुंचने की बात बतायी जा रही है।
क्या है कोबरा कमांडो
सीआरपीएफ के ही चुने हुए जवान कोबरा बटालियन में शामिल रहते हैं। जिन्हें कोबरा मतलब कमांडो बटालियन फोर रिसोल्ट एक्शन के नाम से जाना जाता है। केंद्र सरकार की अनुमति के बाद वर्ष 2008 में इस बटालियन का गठन किया गया था। ये जंगल के संसाधनों से ही युद्ध के दौरान भोजन तलाश लेते हैं। रात को भी युद्ध करने में माहिर होते हैं।