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रात्रि पाली के डॉ अस्पताल की बजाय घर में रहते हैं, इसलिए सेलकर्मी को समय पर नहीं मिली दवा
सेल गुवा की खदान के सामग्री प्रबंधन विभाग में कार्यरत सेलकर्मी अशोक प्रसाद (46) की मंगलवार देर रात मौत हो गई। अशोक प्रसाद को हार्ट अटैक आया था। लेकिन डाक्टरों की लापरवाही से उन्हें नींद की दवा दे दी। सेल के गुवा अस्पताल में जीवन रक्षक दवाइयों के नहीं रहने से समय पर दवाइयां उपलब्ध नहीं हो सकी। इस वजह से अशोक प्रसाद की मौत हो गई। साथ ही अस्पताल में समय से इलाज शुरू हुआ होता तो उनकी जान बच जाती। रात्रि पाली के डॉक्टर अस्पताल में मौजूद नहीं थे। इंटक के क्षेत्रिय महासचिव दुचा टोप्पो ने कहा कि सेल प्रबंधन सिर्फ उत्पादन पर ध्यान दे रहा है। अस्पताल में डाॅक्टर नहीं है। दवाइयां नहीं है, लेकिन उत्पादन के बल पर महाप्रबंधक वाहवाही लूट रही है। अशोक तो सेल कर्मी था। इसलिए उसके परिवार वालो को काफी कुछ देने पर विचार हुआ। लेकिन दवाइयां नहीं रहने के कारण एक सब्जी विक्रेता की मौत हो जाती है तो उसकी क्षतिपूर्ति कौन करेगा।
सेल गुवा की खदान के सामग्री प्रबंधन विभाग में कार्यरत थे अशोक प्रसाद, सेल अस्पताल में जरूरी दवाइयां उपलब्ध नहीं, अंतिम समय तक गैस की दवा तलाशते रहे चिकित्सक
यूनियन ने लापरवाही के लगाए आरोप, विरोध प्रदर्शन
सेल गुवा खदान में कार्यरत कर्मी सह मजदूर नेता की मौत के बाद विरोध प्रदर्शन करते यूनियन के सदस्य।
गैस की शिकायत के बाद हार्ट अटैक
परिवारवालों के अनुसार रात के 10 बजे अशोक दास ने खाना खाया और सोने के लिए चले गए। रात एक बजे उन्हें पेट में गैस की शिकायत हुई। साथ ही बेचैनी भी हुई। इसके बाद उनके परिवार वाले उन्हें अस्पताल ले गए। अस्पताल में रात्रि पाली में डाक्टर के ऑन ड्यूटी होने के बाद भी उस समय डाक्टर भेंगरा अस्पताल में न रह कर अपने घर में सो रही थी। काफी मुश्किल के बाद उन्हें अस्पताल लाया गया, जिसके बाद मरीज की जांच की गई। इस दौरान अस्पताल में जीवन रक्षक दवाएं नहीं थीं। इसके बाद चिकित्सकों ने नींद की दवा देकर अशोक प्रसाद को सुला दिया, जिससे उनकी मौत हो गई।
सामान्य बीमारी समझ दी नींद की दवा
डाॅक्टर को यह सामान्य बीमारी लगी और उसने नींद का इंजेक्शन दे दिया और घर चले गए। इसके बाद मरीज की हालत और बिगड़ गई। इसके बाद वरीय डाॅक्टर पहुंचे और गैस के इंजेक्शन की मांग की। इस साधारण से दवा के नहीं रहने के कारण मरीज की मौत हो गई। लोगों का कहना है कि रात्रि पाली में डाक्टरों की तैनाती होती है जिसके एवज में डाक्टर रात्रि अलाउंस भी पाते हैं। अस्पताल में नहीं रह कर ये डाक्टर घर में आराम करते हैं। इस कारण मरीजों की मौत हो जाती है। ऐसे में प्रबंधन से सभी मांग करते हैं कि रात्रि पाली में तैनात डाॅक्टर अस्पताल में ही रहें। उन्होंने इसे लेकर आंदोलन की चेतावनी दी।
मौत के बाद एक मंच पर सभी यूनियन
अशोक दास की मौत के बाद सभी यूनियनों ने एक साथ आने का फैसला लिया और लाश नहीं उठाने की बात पर अड़ गई। इसके बाद सेल प्रबंधन के साथ मजदूर नेताओं की कई दौर की वार्ता हुई। इसके बाद फैसला हुआ कि मृतक की प|ी को सप्लाई में नौकरी एवं मंथली सैलरी दी जाएगी जो उसके पति अब तक पाते आए हैं। मजदूर नेता टुच्चा टोप्पो ने कहा है कि प्रबंधन व्यवस्था संभालने में फेल हो गया है। सिर्फ प्रोडक्शन हो रहा है। चहुमुंखी विकास की बात खोखली है। अस्पताल तक इससे अछूता नहीं है। एक मरीज की मौत हो जाती है। क्योंकि अस्पताल में जरुरी दवाइयां नहीं है। ऐसा अस्पताल रखने का क्या फायदा। अब सभी यूनियन एक हैं। जरूरत पड़ी तो उत्पादन ठप किया जाएगा। रात्रि पाली में तैनात डाॅक्टर को घर की बजाय अस्पताल में ही रहना होगा।