झालसा रांची के निर्देशानुसार पीडीजे संदीप श्रीवास्तव के नेतृत्व में मंडलकारा में जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से जेल अदालत सह विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इसका विधिवत उदघाटन मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मनीष ने किया।
उन्होंने कहा कि सीजेएम ने कहा कि कारा में रहने वाले सभी बंदी अपराधी नहीं होते हैं। जब तक उसके वाद में साक्ष्य प्रस्तुत होने के बाद करने के बाद अपराध सत्यापित नहीं हो जाता है। बहुत सारे केस में अपराध साबित नहीं होता है और उन्हें दोषमुक्त कर दिया जाता है। इसलिए आप सभी खुद को अपराधी नहीं मानें और अपने मन को शांत रखते हुए अच्छा जीवन जीने का प्रयास करें। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव विनोद कुमार ने न्यायालय में केस कैसे चलता है और उसका निष्पादन कैसे किया जाता है। इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि झालसा द्वारा गरीब व असहाय बंदियों को मुफ्त में अधिवक्ता प्रदान किया जाता है। यदि किसी बंदी को फ्री में अधिवक्ता चाहिए, तो वे झालसा में आवेदन दे सकते हैं। इसके अतिरिक्त बंदियों को और किसी प्रकार की असुविधा है, तो वे आवेदन दें। उनकी सभी प्रकार की समस्याओं के समाधान का पूरा प्रयास किया जाएगा।
अधिवक्ता बुंदेश्वर गोप ने डायन प्रथा, हत्या, मानव तस्करी, बाल अपराध, दहेज प्रताड़ना अधिनियम समेत अन्य कानूनों के बारे में बताया और बंदियों को अपराध से दूर रहने को कहा।
मौके पर बंदियों के आवेदन पर विचार किया गया और निर्देश दिया गया कि वे अधिक संख्या में आवेदन झालसा को दें। ताकि उनके आवेदनों पर विचार कर उन्हें जेल से मुक्त करने का प्रयास किया जाए। धन्यवाद ज्ञापन जेल अधीक्षक बेसरा निशांत रॉबर्ट ने किया। इस मौके पर एसडीजेएम मनोज राम, जेएम प्रथम उत्तम सागर राणा, अरुण कुमार, अशोक राम, राकेश कुमार व मनीष कुमार मौजूद थे।
मंडलकारा में जेल अदालत सह विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन, सीजेएम दी बंदियों को दी कानून की जानकारी
शिविर में जानकारी देते सीजेएम व अन्य।