नमाज अदा करते मुस्लिम धर्मावलंबी।
रोजा रखकर भूखों के तकलीफ का एहसास करते हैं रोजेदार
जामा मस्जिद में नमाज से पूर्व अपनी तकरीर के दौरान मौलाना अहमद अली मिस्वाही ने कहा कि रोजा रखना हर मुसलमान बालिग औरत व मर्द पर फर्ज है। रोजा रखने से इस बात का पता चलता है जब कोई गरीब भूख की शिद्दत में होते हैं तो उन्हें कैसी तकलीफ होती है। रोजेदार रोजा रखकर इस तकलीफ का एहसास करते हैं। साथ ही गरीबों के प्रति उनमें सहयोग व हमदर्दी की भावना बढ़ती है।