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सेव द चिल्ड्रन से 6 साल तक के बच्चों का होगा मानसिक विकास

3 वर्ष पहले
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सेव द चिल्ड्रन योजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों का नामांकन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बच्चों के स्वास्थ्य तथा पोषण का देखरेख एलजीएसएस द्वारा किया जाएगा। एलजीएसएस सेव द चिल्ड्रन योजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों एवं विद्यालयों के बच्चों का रजिस्ट्रेशन एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए काम करेगी। सेव द चिल्ड्रन योजना के तहत प्रारंभ में जिले के भरनो व गुमला प्रखंड के 100 आंगनबाड़ी केंद्र एवं 50 विद्यालय को आच्छादित किया जाएगा। योजना की सफलता के लिए सीडीपीओ, बीईओ, महिला पर्यवेक्षक एवं अन्य कर्मियों की मदद ली जाएगी। यह बातें विकास भवन के सभागार में सेव द चिल्ड्रन योजना की लांचिंग बैठक में उपायुक्त श्रवण साय ने कहा। उन्होंने कहा कि अभियान के लिए प्रारंभ में चयनित प्रखंड में 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक क्षमताओं का विकास किया जाना है। सरकार की कई ऐसी योजनाएं चल रही है, इसी उद्देश्य को सफल बनाने के लिए एलजीएसएस से उम्मीद व शुभकामनाओं के साथ लक्ष्य को हासिल करने में मददगार होगा। उन्होंने कहा कि बच्चों को नई दिशा में ले जाने में एलजीएसएस महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का कार्य करेगी। इस मौके पर उप विकास आयुक्त नागेन्द्र कुमार सिन्हा ने कहा कि 100 आंगनबाड़ी केन्द्रों एवं 50 विद्यालय भरनो व गुमला प्रखंड में प्रारंभ करने का लक्ष्य है। योजना से जुड़े कर्मी ईमानदारी, मेहनत के साथ कार्य करें। उन्होंने कहा कि योजना की सफलता के लिए जमीनी स्तर तक काम करें। साथ ही नियमित गतिविधि चलाकर लोगों को जागरूक करने एवं कारगर बनाने को कहा। इसके अलावा डीडीसी ने योजना की बराबर मॉनीटरिंग करने को कहा।

इस मौके पर चन्द्रपती यादव, महादेव हांसदा, डीआरडीए डायरेक्टर मुस्तकिम अंसारी, जिला शिक्षा अधीक्षक गनौरी मिस्त्री, समाज कल्याण पदाधिकारी बसंती ग्लाडीस बाड़ा एवं अन्य मौजूद थे।

आंगनबाड़ी कर्मियों व स्कूल के शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा

अभियान के प्रबंधक सह स्टेट प्रोग्राम मैनेजर महादेव हांसदा व विवेक आनन्द प्रोजेक्ट को-आॅर्डिनेटर ने अभियान के उद्देश्य, लक्षित, कवरेज एरिया, रणनीति एवं प्रशासन से सहयोग से संबंधित विषयों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि परियोजना के अंतर्गत आंगनबाड़ी कर्मियों व विद्यालय के शिक्षकों को प्रारंभ में बाल अवस्था शिक्षा, बाल विकास व उसके विभिन्न आयामों के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा। साथ ही बच्चों के अभिभावकों को घरों पर मानसिक तथा तार्किक विकास कैसे हो इस बिंदु पर उन्हें भी प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसमें आंगनबाड़ी केंद्रों की तैयारी बच्चों अनुकूल पूर्ण तैयारी किया जाना है ताकि बच्चे पूर्ण तैयारी के साथ विद्यालय में अधिकतम उपस्थित हो।

दीप जलाते डीसी, डीडीसी व अन्य।

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