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गुमला की बेटी सात साल बाद विक्षिप्त हालत में फरीदाबाद से वापस लाई गई

3 वर्ष पहले
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नौ साल की उम्र में स्वास्थ्य अवस्था में बेची गई गुमला की बेटी सात साल बाद अस्वस्थ (विक्षिप्त) अवस्था में फरीदाबाद से बरामद कर वापस लाईं गई। फरीदाबाद पुलिस के सहयोग से शक्ति वाहनी दिल्ली की टीम उसे गुमला लेकर पहुंची। जहां मंगलवार को सीडब्ल्यूसी के समक्ष उसे पेश किया गया। फिर सीडब्ल्यूसी उसे परिजनों को सौंप दिया। परिजन उसे अपने साथ सिसई प्रखंड के खिदवा टोली गांव ले गए।

सीडब्ल्यूसी के सदस्य संजय कुमार ने बताया कि शक्ति वाहनी के टीम को फरीदाबाद के पुलिस ने फोन कर यह जानकारी दी थी कि झारखंड के गुमला जिला की एक नाबालिग युवती फरीदाबाद में घूम रही है। उसकी मानसिक स्थित ठीक नहीं है। इस पर शक्ति वाहनी की टीम सक्रिय हुई। और इसकी सूचना गुमला सीडब्ल्यूसी को दी। जांच-पड़ताल के बाद पता चला कि नाबालिग सिसई प्रखंड के खिदवाटोली गांव की है। इसके बाद शक्ति वाहनी की टीम ने फरीदाबाद पुलिस को युवती के परिजनों का पता चलने की जानकारी दी। फिर फरीदाबाद पुलिस युवती को दिल्ली साथ लाकर शक्ति वाहनी के टीम को सुपुर्द कर दिया। शक्ति वाहनी की टीम उसे 8 मई को रांची लाकर वहां के सीडब्ल्यूसी को सुपुर्द कर दिया। सीडब्ल्यूसी ने उसे प्रेम आश्रय में रखा। साथ ही युवती की स्थिति देख उसे रिनपास से सात दिनों तक इलाज कराता रहा। चिकित्सकों द्वारा दवा देकर घर में ही रहते हुए ठीक होने की बात कहा गया। इसके बाद गुमला सीडब्ल्यूसी के चेयरमेन शंभु सिंह ने रांची पहुंचकर उसे अपने साथ गुमला लेकर पहुंचे।

नाबालिग बेटी की ऐसी स्थिति देखकर मां फूट-फूटकर रो पड़ी

मां जगटी उराईन ने बताया कि सात साल पूर्व परिवार के ही बहु जनवारी देवी ने नाबालिग बेटी को छारदा गांव के शकुंतला देवी के हाथों बेच दिया था। इसकी लिखित शिकायत सिसई थाने में की गई थी। परंतु अबतक किसी प्रकार का कोई कार्रवाई नहीं हुई। शकुंतला देवी उसके बाद अबतक गांव नहीं आई है। उन्होंने बताया कि सात साल पहले बच्ची गांव के ही स्कूल में तीसरी कक्षा में पढ़ाई करती थी। बेटी की स्थिति देखकर मां रो पड़ी। उन्होंने बताया कि वर्षों पूर्व पति लोहरा राम की मौत हो चुकी है। किसी प्रकार खेतीबारी कर परिवार का भरण पोषण कर रही थी। उन्होंने बताया कि चार बेटियां है।

स्वस्थ होने के बाद काउंसलिंग की जाएगी

इस संबंध में सीडब्ल्यूसी के चेयरमेन शंभु सिंह ने बताया कि लड़की की स्थिति अभी ठीक नहीं है। उसकी स्थिति में सुधार होने के बाद काउंसलिंग की जाएगी। तब तक सीडब्ल्यूसी अपने स्तर से इसकी जांच-पड़ताल करते रहेगी।

सीडब्लूसी परिसर में नाबालिक व परिजन।

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