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नाबालिग को बेचने वाले को 10 साल की सजा मिली

3 वर्ष पहले
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एडीजे-6 के न्यायाधीश राकेश कुमार मिश्र की अदालत ने गुमला प्रखंड की नाबालिग को बेचने के मामले की सुनवाई करते हुए अरमई बेहराटोली निवासी अनु उरांव को दोषी पाते हुए 10 साल की सजा सुनाई। 10 हजार का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना की राशि नहीं देने पर दो साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी। वहीं धारा 342 आईपीसी के तहत एक साल की सजा व एक हजार रुपए जुर्माना लगाया। इसमें जुर्माना नहीं देने पर दो माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। धारा 370 आईपीसी के तहत 10 साल की सजा व 10 हजार का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना की राशि नहीं देने पर दो साल अतिरिक्त सजा काटना होगा। धारा 374 के तहत एक साल की सजा व एक हजार जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना की राशि नहीं देने पर दो माह अतिरिक्त कारावास की सजा काटनी होगी। धारा 120 (बी) आईपीसी आरआई के तहत सात साल की सजा व तीन हजार का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना राशि नहीं देने पर अतिरिक्त छह माह का कारावास की सजा सुनायी गयी है। सभी सजा साथ-साथ चलेगी। जुर्माना का राशि पच्चीस हजार रुपया प्राप्त होने पर उसका 80 प्रतिशत हिस्सा पीड़िता को दिया जाएगा। वहीं इस मामले का दूसरा आरोपी अरमई बेहराटोली निवासी संगीता कुमारी अभी भी फरार है। ज्ञात हो कि 3 जनवरी 2013 को आरोपी अनु उरांव व संगीता कुमारी ने नाबालिग को घूमने के बहाने गांव से लेकर पहले गुमला आए थे। इसके बाद बस से रांची ले गये। उसे जबरन ट्रेन से लुधियाना ले गए।

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