बेटे का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने 78 दिन से लगा रहे अस्पताल का चक्कर
सदर थाना अंतर्गत डेवीडीह पतराटोली निवासी प्रदीप लकड़ा अपने बेटे संदीप लकड़ा का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए 78 दिनों से सदर अस्पताल का चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन अब तक मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बन पाया। परेशान होकर उसने नगर परिषद अध्यक्ष दीपनारायण उरांव से शिकायत की कि उसके बेटे संदीप लकड़ा की मौत 26 फरवरी को सड़क दुर्घटना में हुई है। उस समय से लगातार अस्पताल का चक्कर लगाने के बाद भी मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बन सका।
इसके बाद दीपनारायण मंगलवार को दिन के 11:30 बजे अस्पताल पहुंचे, तो वहां नए मामले का खुलासा हुआ। अस्पताल में उन्हें मालूम चला कि मृत्यु प्रमाण पत्र का रजिस्टर गायब है। इसपर दीपनारायण ने डीएस आरएन यादव से कहा कि सरकारी दस्तावेज अस्पताल से गायब है और अस्पताल प्रबंधन को इसकी जानकारी तक नहीं है। ऐेसे में लोगों का मृत्यु प्रमाण पत्र कैसे बनेगा। रजिस्टर में कितने लोगों का नाम अंकित होगा। जिन्होंने प्रमाण पत्र के लिए आवेदन दिया होगा। उन्होंने पहले डीएस को आधे घंटे का समय रजिस्टर को खोजने के लिए दिया। इस अवधि में भी रजिस्टर नहीं मिलने पर इसके लिए जिम्मेवार रजिस्टर की देखरेख करने वाले कर्मी राजू सिंह पर नामजद प्राथमिकी दर्ज कराने की बात कही। फिर नरमी बरतते हुए कर्मी राजू को दो दिनों का समय दिया।
कहा कि गुरुवार को दोपहर 12 बजे तक रजिस्टर खोजे। अन्यथा प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। गलती आपकी है, तो इसका खामियाजा आम लोग क्यों भुगतेंगे। कर्मी राजू ने कहा कि उससे गलती हुई है। वह रजिस्टर खोजने की पूरी कोशिश कर रहा है। मगर रजिस्टर नहीं मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि फिर से वह रजिस्टर तलाशने में जुट गया है। इस मौके पर कांग्रेस युवाध्यक्ष राजनील तिग्गा, दीपक कुमार थे।
दो बार आवेदन दिए, हर राेज दौड़ रहे हैं : प्रदीप
प्रदीप लकड़ा ने बताया कि बेटे की मौत के बाद से उन्होंने दो बार आवेदन दिया है। पहली तिथि उन्हें याद नहीं है। उस समय अस्पताल में कहा गया कि रजिस्टर में नाम दर्ज नहीं है। जिसके बाद उन्होंने 28 अप्रैल को पुन: आवेदन दिया और तब से रोज उन्हें दौड़ाया जा रहा है। तब उन्होंने नप अध्यक्ष से संपर्क किया। मंगलवार को अध्यक्ष के साथ अस्पताल पहुंचने पर जानकारी हुई कि रजिस्टर गायब है।
दो दिन में रजिस्टर नहीं मिला, तो केस करेंगे : डीएस
अस्पताल के डीएस आरएन यादव ने कहा कि अस्पताल में दो प्रकार का रजिस्टर बनता है। पहला किसी घटना में घायल लोगों का और दूसरा मृत लोगों का। दोनों रजिस्टर कर्मी राजू सिंह के पास रहता है। दोनों रजिस्टर गायब हैं। जबकि रजिस्टर चतुर्थ वर्गीय कर्मी सोमरा उरांव के माध्यम से राजू के पास भेजा गया था। लेकिन राजू की गलती से रजिस्टर गायब है। उसे इसकी जानकारी अस्पताल प्रबंधन को देनी थी। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।
कर्मी राजू से पूछताछ करते डीएस व नप अध्यक्ष।