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गुना | दुनिया में ढूंढ़ने पर भी कहीं भी कृष्ण

3 वर्ष पहले
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गुना | दुनिया में ढूंढ़ने पर भी कहीं भी कृष्ण और सुदामा जैसी मित्रता नहीं मिलेगी, उनकी मित्रता निस्वार्थ थीं और आज के समय में लोग बिना मतलब और स्वार्थ के मित्रता तो दूर किसी से बात तक करना पसंद नहीं करते हैं। यह बात पं. नरेंद्र गुरुजी महाराज ने कही। वह शहर के महावीरपुरा स्थित धर्मशाला परिसर में चल रही संगीतमय श्रीमद् भावगत कथा के सातवें दिन शनिवार को कृष्ण- सुदामा के चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए बोल थे। उन्होंने कहा कि सुदामा के प्रभु श्रीकृष्ण से दो नाते थे। एक मित्रता और दूसरा भक्त और भगवान का। अपने बुरे वक्त में भी जब सुदामा अपने मित्र एवं प्रभु श्रीकृष्ण के पास मदद मांगने नहीं जा रहे थे, तब उनकी प|ी के जिद करने पर वह द्वारिका गए थे। जहां वह महल के बाहर पहुंचे और द्वारपालों से कहा कि जाओ अपने प्रभु श्रीकृष्ण के पास जाकर संदेश दो कि उनका बाल सखा सुदामा आया है। इस पर पहले तक द्वारपालों ने उनका मजाक उड़ाया फिर संदेशा सुनाने पहुंच गए। सुदामा के आने का संदेश सुनकर प्रभु श्रीकृष्ण महल से नंगे पैर दौड़कर अपने बालसखा सुदामा को लेने आए। जहां से रथ में बिठाकर उन्हें अपने साथ आदर सहित महल के अंदर लेकर गए। रोजाना दोपहर एक से शाम 6 बजे तक चल रही कथा को सुनने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। आयोजक रमेश राठौर ने बताया कि 15 अप्रैल रविवार को आखिर दिन पूर्णाहुति के बाद प्रसादी वितरित की जाएगी।

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