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अक्षय तृतीया पर जिनालय में हुई विशेष धर्मसभा में मुनि निर्णय सागर महाराज ने कहा

3 वर्ष पहले
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अक्षय तृतीया पर जिनालय में हुई विशेष धर्मसभा में मुनि निर्णय सागर महाराज ने कहा

भास्कर संवाददाता| गुना

अक्षय तृतीया पर्व का जैन धर्म में विशेष स्थान है। इस दिन दान तीर्थ का प्रवर्तन हुआ था। आज ही के दिवस राजा श्रेयांस ने मुनिराज आदिनाथ को इक्षु रस का आहारदान दिया था। तीर्थंकरों को आहार लेने की आवश्यकता नहीं होती है। दान तीर्थ के प्रवर्तन करने के लिए तीर्थंकर आहार लेते हैं। यह बात मुनि निर्णय सागरजी महाराज ने कही। वह अक्षय तृतीया के मौके पर बुधवार को शहर के बड़ा जैन मंदिर स्थित महावीर भवन चौधरी धर्मसभा को संबोधित करते हुए बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि अंतराय कर्म किसी को नहीं छोड़ता है। तीर्थंकर प्रकृति के बंध के बाद भी यह कर्म उदय में आ सकता है। इसलिए सभी को अंतराय कर्म के बंध से बचना चाहिए। जनसामान्य को कभी भी अच्छे कार्यों में व्यवधान नहीं डालना चाहिए। सद्कर्मों को सदैव प्रोत्साहन देना चाहिए।

इसके पूर्व मुनि पदम सागरजी महाराज ने कहा कि हुण्डाअवसर्पिणी काल दोष के कारण इस युग में कुछ विचित्र घटनाएं घटी हो पूर्व में घटित नहीं हुई। भगवान महावीर व पाश्र्वनाथ पर उपसर्ग होना जैसी कुछ घटनाएं हैं। मुनिश्री ने कहा कि आज के दिन हमें भगवान आदिनाथ के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में को उन्नत बनाना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन अनिल बड़कुल ने किया। इस मौके पर जैन समाज अध्यक्ष संजीव जैन, मंत्री कमलेश जैन, एसके जैन, संजय कटारिया, आनंद कुमार जैन आदि सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद थे।

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