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गायत्री महायज्ञ में 108 वेदियों पर 7000 लोगों ने दी पूर्णाहुति

3 वर्ष पहले
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गायत्री परिवार द्वारा शहर में आयोजित किए जा रहे 108 कुंडीय श्रद्धा संवर्धन गायत्री महायज्ञ का शुक्रवार को पूर्णाहुति के साथ समापन हो गया। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के बैनर तले गायत्री परिवार द्वारा गुना में पूर्व में कराए गए अश्वमेध यज्ञ के 25 साल पूरे होने पर अश्वमेध की रजत जयंती मनाई गई।

बीते 3 अप्रैल से चल रहे श्रद्धा संवर्धन गायत्री महायज्ञ में शांतिकुंज हरिद्वार से आए पं. श्याम बिहारी दुबे ने संगीत टोली के माध्यम से विभिन्न संस्कार कराए। आखिरी दिन महायज्ञ में 7 हजार श्रद्धालुओं ने पूर्णाहुति की।

गुना, अशोकनगर, राजगढ़, शिवपुरी, भोपाल के 25 हजार लोग हुए शामिल: मीडिया प्रभारी सुनील सेन ने बताया कि यह कार्यक्रम की महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि कलश यात्रा भव्य रही जो कि 25 वर्ष बाद देखने मिली। दीप यज्ञ भी हुआ जिसमें 5000 लोगों ने भाग लिया। स कार्यक्रम में 3 दिन में गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, राजगढ़, भोपाल और ग्वालियर सहित मप्र के अलावा उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र व बैंगलूर आदि से करीब 25000 हजार लोगों ने भाग लिया।

अश्वमेध यज्ञ के 25 साल पूरे होने पर हुआ था महायज्ञ

3 दिन में 25 हजार लोगों ने कराए सभी 16 संस्कार
श्रद्धा संर्वधन 108 कुंडीय महायज्ञ में हरिद्वार से आए पं.श्याम बिहारी दुबे द्वारा मंत्रोच्चारण कर अहुतियां दिलाई गई।

बेहतर स्वास्थ्य के लिए 5000 श्रद्धालुओं ने किया महा मत्युंजय मंत्र का जाप
महायज्ञ में संस्कार पं. दुबे के माध्यम से कराया। साथी पाठक को शाम को पांच हजार लोगों के साथ गायत्री महामंत्र के साथ सभी की शुभकामनाओं के लिए महामृत्युंज मंत्र से स्वास्थ्य के लिए पंडित श्री दुबे ने दी। उन्होंने बताया कि यज्ञ भी होते हैं। शुक्रवार सुबह श्री दुबे ने बताया कि श्रृष्टि का संतुलन जब भी बिगड़ता है, तब भगवान किसी न किसी रूप में जन्म लेते हैं। मंच संचालन नारायण प्रसाद शर्मा, शिवचरण नामदेव ने किया। आभार गायत्री शक्ति पीठ प्रमुख ट्रस्टी मोहन प्रसाद शर्मा ने माना। इसमें अग्रवाल समाज ने चार दिन तक निशुल्क भोजन व्यवस्था, महाराष्ट्रीयन समाज ने निशुल्क शीतल जल की व्यवस्था की गई। गीता स्वाध्याय ने बाहर जल व्यवस्था की। लायंस क्लब ने मुफ्त नेत्र शिविर लगाया।

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