जिले की 3 बेटियां सिविल जज बन गई हैं। एक ने तो पहली बार में ही परीक्षा में सफलता प्राप्त की। गुरुवार को सिविल जज परीक्षा का घोषित हुए रिजल्ट में शहर की बेटी और बहू अर्चना यादव, नेहा सावनेर और आकांक्षा यादव जज बनी। सामान्य एवं एससी कोटे से इन तीनों ने अच्छी रैंक पाई है। इन तीनों को गुना से रिश्ता-नाता है। पिछली साल ही बीए, एलएलबी करने के बाद इस परीक्षा की तैयारी में जुटी आकांक्षा यादव को पहली बार में ही सफलता मिल गई। वहीं दो अन्य बेटियों ने भी घर पर रहकर तैयारी की, इसमें गुरुजनों, माता-पिता का सहयोग रहा।
सफलता
जनपद के एडीईओ, पोस्टमास्टर एवं व्यवसायी की हैं बेटियां, आकांक्षा ने घर पर रहकर ही तैयारी की
भ्रष्टाचार की लड़ाई में पिता को देखकर जज बनने की ठानी
आकांक्षा यादव के पिता जनपद पंचायत राघौगढ़ में सहायक विकास विस्तार अधिकारी हैं। वह भ्रष्टाचार के खिलाफ हमेशा आवाज उठाते रहे हैं। बेटी ने बताया कि पिता को दो बार निलंबित इसी वजह से किया, वह परेशान रहते थे। यही देखकर मैंने सोचा कि नौकरशाह नहीं बल्कि न्यायपालिका में जाऊंगी। ताकि हर उस व्यक्ति को इंसाफ दिला सकूं, जो न्याय की उम्मीद में आता है। आकांक्षा की 23 की रैंक है।
हमेशा पिता ने बेटों की तरह ही रखा, कभी भी बंदिश नहीं लगाई
अर्चना यादव गुना की बेटी हैं, इनके पिता प्रतिष्ठित व्यवसायी बृजमोहन आजाद हमेशा गरीब लोगों को न्याय दिलाने के लिए आगे रहते हैं। अर्चना ने बताया कि पिता ने मुझे 3 भाइयों की तरह की पाला। कभी किसी बात की बंदिश नहीं लगाई। 4 साल की बेटी और एडीपीओ की नौकरी करते हुए परीक्षा की तैयारी की। इसमें माता-पिता, सास-ससुर और पति का पूरा सहयोग रहा। अर्चना की 37वीं रैंक है।
मां कानून की जानकार हैं, उन्हीं की मदद से राह मिली
नेहा सावनेर ने कहा कि पिता आरके सावनेर पोस्टमास्टर हैं, मां कानून की जानकार। इन दोनों की मदद से मुझे राह चुनने का मौका मिला। इसके अलावा गुरुजनों का पूरा सहयोग रहा। नेहा ने बताया कि मैं लगातार पढ़ती रही, मां का पूरा सहयोग मिला। नेहा की 6वीं रैंक है।