वल्लभाचार्य की जयंती पर प्रभात फेरी निकालकर मनाया पालना महोत्सव
महाप्रभु वल्लभाचार्य की 541 वीं जयंती पर हुए धार्मिक प्रवचन कार्यक्रम
गुना | पुष्टिमार्ग का अर्थ होता है भगवान के अनुग्रह का पथ। परब्रह्म श्रीकृष्ण भगवान का अनुग्रह ही एकमात्र साधन है। यह पुष्टिभक्ति मार्ग सब प्राणियों के लिए वर्ण, जाति, देश किसी भी भेदभाव के बिना सर्वदा तथा सर्वथा उपादेय है।
भक्ति के द्वारा ही भगवान का अनुग्रह हमें प्राप्त होता है। यह बात पुष्टिमार्गीय वैष्णव परिषद मप्र के प्रांतीय प्रचार प्रमुख कैलाश मंथन ने पुष्टिमार्ग के प्रवर्तक वल्लभाचार्य की 541 वीं जयंती कार्यक्रम में कही। अंचल के 150 पुष्टिभक्ति केंद्रों एवं श्रीनाथ जी के मंदिरों में विशेष मनोरथ उत्सव हुए। गुना में प्रात: श्रीनाथ जी के मंदिर से प्रभातफेरी शहर के प्रमुख मार्गों से निकली। इस मौके पर परिषद के जिला संयोजक कैलाश मंथन ने कहा कि श्रीमद् वल्लभाचार्य जी ने निराश्रय दीन जीवों के उद्धार का एकमात्र साधन पुष्टिभक्ति मार्ग को बताया। जीवात्मा और परमात्मा दोनों ही शुद्ध हैं। इसी से मत का नाम शुद्धाद्वैत पड़ा है। श्रीनाथ जी के मंदिर में श्री महाप्रभु की जयंती पर पालना महोत्सव एवं दोपहर में तिलक आरती में बड़ी संख्या में वैष्णवगण उपस्थित रहे।