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हादसा | शहर से 5 किमी दूर पुरापोषर गांव की घटना, सभी बच्चे जिला अस्पताल में भर्ती, 1 की हालत गंभीर
शहर से 5 किमी दूर स्थित पुरापोषर गांव में 7 बच्चे हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गए । उनकी जिंदगी खतरे में देख 18 वर्षीय युवक ने 100 फीट दूरी से दौड़ लगाई और सभी को बचा लिया लेकिन इस जद्दोजहद में उसकी मौत हो गई। कथा स्थल से बच्चे 20 फीट ऊंची लोहे की सीढ़ी ले गए, तभी यह हाईटेंशन लाइन से टकरा गई। सभी बच्चों को जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है। 1 की हालत गंभीर है। दोपहर 3 बजे के लगभग यह घटना हुई, गांव में 11 अप्रैल से कथा चल रही है। स्कूल से छुट्टी होने के बाद बच्चे यहां पर आ जाते हैं। वह खेलते भी हैं और कथा समिति के कार्य में हाथ सहयोग करते थे। शुक्रवार दोपहर राकेश लोधा, हेमराज लोधा, विशाल लोधा, राजेश लोधा, रोहित लोधा, प्रशांत लोधा, अरुण लोधा कथा स्थल से 20 फीट ऊंची लोहे की सीढ़ी ले गए। वह कुछ दूरी पर ही स्थित विवाह सम्मेलन स्थल (जहां 18 अप्रैल को लोधा समाज का विवाह सम्मेलन होगा) पर ले गए। वह जगह-जगह लकड़ी की झंडी बांध रहे थे। सीढ़ी को सरका कर जैसे ही आग गए तो पास से निकली हाईटेंशन लाइन से वह टकरा गई। करंट फैला तो इसके ऊपर जो बच्चे थे जमीन पर आकर गिरे। वहीं कुछ बच्चे इसे धक्का दे रहे थे वह भी चिपक गए। तभी 18 वर्षीय बालकिशन ने बच्चों को मुसीबत में देख दौड़ लगाई और सीढ़ी को बिजली लाइन से दूर खींच लिया। इससे सभी की जान बची। लेकिन युवक झुलस गया, जिससे उसकी मौत हो गई।
सात बच्चों को करंट की चपेट में अाता देख युवक ने सीढ़ी खींचकर सभी को बचाया, खुद की मौत
18 अप्रैल को होने वाले लोधा समाज के विवाह सम्मेलन की तैयारियां करवा रहे थे बच्चे
बच्चों को बचाने वाला बालकिशन सम्मेलन की तैयारी में जुटा था
मृतक बाल किशन सम्मेलन की तैयारी में जुटा था। वह कथा स्थल पर भी सुबह आ जाता था। इसके अलावा वहां की व्यवस्थाओं को भी जुटाता था। मृतक माता-पिता का खेती में हाथ बंटाता था। उसका एक बड़ा भाई है। उसकी मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
प्रत्यक्षदर्शी की जुबानी पूरा हादसा
आग लगती देख मैं भी दौड़ा, बालकिशन ने सभी को बचा लिया था
प्रत्यक्षदर्शी दर्शनलाल ने बताया कि घटना स्थल पर आग लग रही थी। मैंने भी दौड़ लगाई लेकिन इससे पहले बाल किशन पहुंच गया था। उसने सीढ़ी को लाइन से दूर कर दिया था। मौके पर घास में आग लग रही थी, बच्चों के कपड़े भी जल रहे थे। इन्हें मैंने अपनी तौलिया से बुझाया। इसके बाद सभी को उपचार के लिए लोगों की मदद से अस्पताल आए।
100 फीट दूर से दौड़कर आया बालकिशन और खुद ही झुलस गया
करंट लगने से मृत बालकिशन के माता-पिता का रो रोकर बुरा हाल है।
24 घंटे बिजली देते हैं, ग्रामीण झूठ बोल रहे हैं
बच्चों से क्यों कराया जा रहा था काम
इस घटना को लेकर आयोजन समिति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने छोटे बच्चों को झंडा लगाने की अनुमति कैसे दे दी। वह विवाह सम्मेलन स्थल पर झंडे लगा रहे थे लेकिन किसी ने नहीं रोका। बच्चों की उम्र 9 से 15 साल तक की है। सभी स्कूल में पढ़ते हैं।
संबंधित घटना को लेकर जांच के बाद ही पूरी स्थिति साफ होगी। हम तो बिजली 24 घंटे दे रहे हैं। इसलिए ग्रामीणों का यह कहना गलत है कि दोपहर 3 बजे बिजली कैसे चालू हो गई।-आनंद श्रीवास्तव, एसई
तीन बड़े सवाल
17 फीट पर थी 11 केवी लाइन : जिस जगह हादसा हुआ, वहां पर बिजली लाइन 17 फीट नीचे से निकली है। जबकि इसकी ऊंचाई 25 से 30 होना चाहिए। ग्रामीण पूर्व में भी इस लाइन को ऊंचा करने की मांग कंपनी से कर चुके हैं।
7 बजे के बाद चालू होती थी लाइन, दोपहर में कैसे हुई : ग्रामीणों का कहना था कि जो बिजली लाइन शाम 7 बजे के बाद चालू होती थी, दोपहर 3 बजे कैसे आ गई। इसको लेकर भी हैरानी जताई। लोग भी निश्चित रहते थे कि रात में बिजली आएगी। इसी वजह से किसी ने बच्चों को वहां जाने से नहीं रोका।
गांव के लोग उमड़े पुलिस, प्रशासन के अधिकारी भी पहुंचे : इस घटना की सूचना पर गांव के लोग अस्पताल में जमा होने लगे। उधर एसडीएम दिनेश शुक्ला, राजस्व अधिकारी और पुलिस अधिकारी अस्पताल आ गए। उन्होंने पूरी स्थिति देखी। सिविल सर्जन डॉ. एसपी जैन ने बच्चों के लिए अलग से दो कूलरों का इंतजाम कराया।