- Hindi News
- National
- नौकरियों में आयु सीमा की छूट को कानूनी संरक्षण देने युवाओं ने पीएम को लिखा पत्र
नौकरियों में आयु सीमा की छूट को कानूनी संरक्षण देने युवाओं ने पीएम को लिखा पत्र
गुना | जिले के कई बेरोजगार युवाओं ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि मूल निवास के आधार पर नौकरियों में आयु सीमा की छूट को कानूनी संरक्षण दिया जाए। हाल ही में असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती में मप्र के मूल निवासी युवाओं को आयु सीमा में छूट दी गई थी पर अन्य प्रदेशों के अभ्यर्थियों ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने आयु सीमा में छूट को असंवैधानिक करार दे दिया। इससे प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया ही रुक गई।
मनोज चौहान, सत्येंद्र चौहान, रमेश शर्मा, शालिनी दुबे आदि युवाओं ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि किसी प्रदेश विशेष के युवाओं को वहां निकलने नौकरियों के लिए आयु सीमा में दी जाने वाली छूट को कानूनी आधार दिया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री से भी अनुरोध इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में जो सरकार की ओर से याचिका दायर की गई है, उस पर मजबूती से पक्ष रखा जाए।
2014 व 2016 के आवेदकों का पक्ष भी रखें : इन युवाओं ने पत्र में यह भी कहा है कि प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में आयु सीमा को लेकर हाईकोर्ट का जो निर्देश आया है, उससे उन आवेदकों के हित भी प्रभावित हो सकते है, जिन्होंने 2014 व 2016 में आवेदन किया था। फिर 2017 में जब पुन: विज्ञापन निकला तो इन आवेदकों को सुप्रीम कोर्ट से आयु के आधार पर राहत मिली थी।
असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में आयु सीमा में छूट को हाईकोर्ट ने अवैध बताया था
... तो हर नौकरी में आयु सीमा 28 वर्ष हो जाएगी
बेरोजगार युवाओं को चिंता है कि हाईकोर्ट के फैसले को आधार बनाकर बाहरी प्रदेश के अभ्यर्थी अब सभी सीधी भर्तियों में दी जा रही छूट का विरोध करेंगे। इससे मप्र के निवासी बेरोजगारों को अधिकतम आयु सीमा में जो 12 साल की छूट मिली है, वह खत्म हो जाएगी। नतीजा यह होगा कि यह आयु सीमा घटकर 28 साल पर आ जाएगी।