पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • चना खरीदी में तिहरी मार; हर बोरी पर 300 ग्राम ज्यादा तौल, 1 किलो का सैंपल भी, नहीं दे रहे रसीद

चना खरीदी में तिहरी मार; हर बोरी पर 300 ग्राम ज्यादा तौल, 1 किलो का सैंपल भी, नहीं दे रहे रसीद

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
इस साल समर्थन मूल्य पर पहली बार चने की खरीदी की जा रही है। अभी इसे शुरू हुए दो दिन ही हुए हैं और किसानों की परेशानियां शुरू हो गई हैं। गुना के दो खरीदी केंद्रों पर प्रति बोरी यानि हर 50 किलो पर 300 ग्राम ज्यादा तौल की जा रही है। साथ ही एक किलो उपज का सैंपल भी जमा कराया जा रहा है। यही नहीं तुलाई से पहले किसानों से उनकी पूरी उपज छनवाई जा रही है। इससे भी उन्हें नुकसान हो रहा है। चौथा यह कि दो दिन पहले की गई खरीदी के बाद किसानों को रसीद भी नहीं मिली और उन्हें सादा कागज पर पावती दे दी गई।

शनिवार और रविवार की छुट्टी के बाद सोमवार यानि 16 अप्रैल को मंडी फिर शुरू होगी तो तीन-चार मुद्दों पर विवाद हो सकता है। मंडी अध्यक्ष का भी कहना है कि किसानों की शिकायत मिल रही है इसलिए अब इन तमाम मुद्दों पर नजर रखी जाएगी। समर्थन मूल्य पर खरीदी 12 अप्रैल से शुरू हो पाई थी जबकि इसे 10 अप्रैल से ही शुरू होना था। नई व्यवस्था के तहत किसानों को एसएमएस भेजकर तुलाई की तारीख के बारे में सूचना दी जाती है। इसमें भी एक शिकायत सामने आ रही है। एसएमएस में यह नहीं बताया जाता है कि किसान को कौन सी जिंस लेकर मंडी आना है।

एसएमएस में नहीं बताया जा रहा कौन सी जिंस लाना है, तुलाई से पहले पूरी उपज को छनवाया भी जा रहा है

नानाखेड़ी मंडी में तौल से पहले अपनी फसल को साफ करता किसान।

किसानों को इस तरह लग रहा है चूना

तौल : नियमानुसार उपज में सिर्फ बोरी के वजन को ही जोड़ा जाता है, जो औसतन 500 ग्राम की रहती है। पर समर्थन मूल्य केंद्र पर इसके अलावा 300 ग्राम अतिरिक्त ताैल हो रही है। हरिपुर के किसान अंबर कुमार ने बताया कि इस मामले में उनकी केंद्र पर काफी बहस हुई। विष्णु धाकड़ और डुंगासरा के भरत सिंह का कहना था कि उनकी उपज की तौल 300 ग्राम ज्यादा की गई।

सैंपल : इसी तरह सैंपल के नाम पर भी किसानों का एक किलो अनाज लिया जा रहा है। ऊमरी के लक्ष्मण सिंह और रतनपुरा के मनोज धाकड़ ने बताया कि यह एक नई परंपरा देखने मिल रही है। आमतौर पर किसानों की ट्रॉली में ही जांच कर ली जाती है। ज्यादा हुआ तो मुट्ठीभर अनाज ले सकते हैं।

छनाई : तुलाई से पहले किसानों की पूरी उपज छनवाई जा रही है। इससे चना या अन्य फसल जमीन पर फैलती है और 5 से 10 किलो तक का नुकसान हो जाता है। इसमें वे पतले दाने शामिल नहीं हैं जो छनाई के दौरान निकलकर अलग हो जाते हैं। फिर तुलाई के दौरान तुलावटी और हम्माल जो नुकसान करते हैं वह अलग है।

दूरी : इस बार खरीदी केंद्र सिर्फ तहसील मुख्यालयों पर ही बने हैं। गुना स्थित केंद्रों पर बमोरी ब्लॉक के किसानोंं को भी पहुंचना पड़ रहा है। कई किसान 70 किमी दूर से आ रहे हैं। आने-जाने में जो भाड़ा लग रहा है, वह भी फसल की लागत का हिस्सा है।

... तो फिर किसान बाजार में क्यों नहीं बेच रहे उपज

इसकी वजह है भाव। सरकारी केंद्रों पर किसानों को 4400 रुपए प्रति क्विंटल भाव मिल रहा है। जबकि बाजार का भाव 3300 से 3500 के बीच ही है। चने के भाव में यह भारी गिरावट है और पिछले कुछ सालों के मुकाबले तो यह आधा ही है।

चने के भाव में गिरावट क्यों

मंडी के कारोबारी बताते हैं कि पिछले साल जब दाल के भाव बहुत बढ़ गए थे, तब सरकार ने इसके आयात की अनुमति दी थी। विदेश से दाल आने में छह से सात माह का वक्त लग गया। तब तक दूसरी फसल आ गई। उधर विदेश की सस्ती दाल भी बाजार में आ गई थी।

केंद्रीय एजेंसियां कर रही हैं खरीदी

समर्थन मूल्य पर इस बार केंद्रीय एजेंसियां ही खरीदी कर रही हैं। इसलिए उन्होंने इसके कुछ मानक बना रखें होंगे। हालांकि बोरी के वजन के अलावा अतिरिक्त 300 ग्राम तौल का कोई नियम नहीं है। हो सकता है कि नमी वाली उपज के मामले में उन्होंने ऐसा किया हो। फिर भी यह गलत है और हम खरीदी केंद्रों पर कड़ी नजर रखेंगे। -जीके श्रीवास्तव, खाद्य आपूर्ति अधिकारी

खबरें और भी हैं...