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मंडी अध्यक्ष कांग्रेस की हैं, सरकार की छवि बिगाड़ रही हैं : नपाध्यक्ष

3 वर्ष पहले
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समर्थन मूल्य खरीदी केंद्रों पर मची भारी अव्यवस्था को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। नगर पालिका अध्यक्ष राजेंद्र सलूजा ने आरोप लगाया है कि प्रदेश सरकार की ओर से तो सभी इंतजाम किए गए हैं, लेकिन मंडी प्रशासन जानबूझकर गड़बड़ी कर रहा है। उनके मुताबिक मंडी अध्यक्ष कांग्रेस की है, इसलिए ऐसे हालात पैदा किए जा रहे हैं, जिससे सरकार की छवि खराब हो। इस पर मंडी प्रबंधन की ओर से भी जवाब आ गया। मंडी समिति की अध्यक्ष मीना अहिरवार और डायरेक्टर बंटी अहिरवार ने कहा कि मंडी के खरीदी केंद्र भाजपा नेताओं के हाथ में ही हैं। समिति का काम मंडी परिसर के भीतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जो करा दी गई हैं। दशहरा मैदान में किसानों को सुविधाएं देने का काम प्रशासन और नगर पालिका का है। उन्होंने कहा बेहतर होगा कि नपाध्यक्ष पहले शहर को ही संभाल लें, जहां लोगों को पानी भी ठीक से नहीं मिल रहा है।

कन्ट्रोवर्सी

मंडी में परेशान हो रहे किसानों की समस्या को लेकर नपाध्यक्ष ने कलेक्टर को लिखा पत्र तो खड़ा हुआ एक और विवाद

मंडी में हर काम के लिए रिश्वत दे रहे हैं किसान : सलूजा

कलेक्टर को लिखे पत्र में नपाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि मंडी में किसानों को हर काम के लिए पैसे देना पड़ रहे हैं। ऑनलाइन नाम दर्ज कराने के 1000 रुपए, टोकन लाने के लिए 1000 और नंबर पर ट्रॉली लगाने के 500 रुपए देना पड़ते हैं। वहीं तुलाई के दौरान 5 से 10 किलो अनाज फैला दिया जाता है। इतनी भीषण गर्मी में किसानों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर मंडी की व्यवस्थाएं न सुधरी तो मुझे धरना प्रदर्शन करना पड़ेगा।

नपाध्यक्ष पहले शहर संभाले, लोगों को पानी भी नसीब नहीं है: मंडी अध्यक्ष

नपाध्यक्ष को इतनी चिंता है तो केंद्र क्यों नहीं बढ़वा देते : अहिरवार

डायरेक्टर बंटी अहिरवार ने कहा कि सारी समस्या की जड़ है बमोरी के खरीदी केंद्रों को बंद करके गुना में शिफ्ट करना। दूसरे एसएमएस व्यवस्था में घपला हुआ, जिसके लिए किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। खरीदी केंद्रों पर भाजपा के लोग ही हैं और वे ही तुलाई से लेकर हर स्तर पर गड़बड़ी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नपाध्यक्ष यह सारा ड्रामा इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि वे बमोरी से चुनाव लड़ना चाहते हैं। अच्छा होता कि वे बमोरी में केंद्र खुलवाने के लिए सरकार से लड़ते।

इन समस्याओं को हल कराने की कोशिश नहीं

44 डिग्री तापमान में किसान 8 दिन से दशहरा मैदान में बिना पानी और छांव के इंतजाम के तुलाई इंतजार कर रहे हैं।

एसएमएस व्यवस्था के बावजूद इतने किसान कैसे एकत्रित हो गए? आज तक इसकी जांच व जवाबदेही पर ध्यान नहीं दिया गया।

बमोरी के खरीदी केंद्रों को क्यों बंद किया गया? किसानों को 100 किमी दूर से गुना आना पड़ रहा है। यह इस समस्या का सबसे बड़ा पहलू है।

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