चार प्रमुख पर्वों का महत्व बताया
शिविर की शुरुआत में शिवचरण नामदेव ने प्रशिक्षार्थी बालिकाओं को पर्व का महत्व बताया। पर्व किस तरह से मनाए जाए इसके संबंध में जानकारी दी। डॉ. देवी शंकर ने स्वस्थ और स्वच्छ पर दैनिक जीवन में कैसे स्वस्थ रहे इसके बारे में जानकारी दी। गायत्री शक्तिपीठ महिला मंडल व ट्रस्ट द्वारा आयोजित किए जा रहे इस निशुल्क आवासीय कन्या कौशल शिविर में अच्छे आचरण को अपने जीवन में उतारे, अपने कौशल का प्रदर्शन कर समाज मे व्याप्त कुरीतियों से लड़कर समाज निर्माण, परिवार निर्माण व राष्ट्रनिर्माण में सहयोगी बने और नारी जागरण में अपना पुरुषार्थ लगाए। इसके संबंध में बालिकाओं को जागरूक करने के साथ ही जानकारी देकर संस्कारित किया जाएगा। शिविर में 12 साल से ज्यादा उम्र की 50 बालिकाएं भाग ले रही है। गायत्री शक्तिपीठ के प्रमुख ट्रस्टी मोहन प्रसाद शर्मा ने कन्या कौशल शिविर में आई बालिकाओं का तिलक लगाकर स्वागत किया। मीडिया प्रभारी सुनील सेन ने बताया कि शिविर में बालिकाओं में कौशलता लाने व उनका मनोबल बढ़ाने और उनके अंदर अच्छा और बुरा की सही पहचान कर पाने की समझ विकसित करना है।
गायत्री परिवार संस्कार की रीढ़ की हड्डी का काम करता है
इसमें जिपं अध्यक्ष श्रीमती चौहान ने शिविरार्थी बालिकाओं से कहा कि शिविर से हमें अच्छे संस्कार मिलते हैं। गायत्री परिवार सदैव संसार में संस्कार की रीढ़ की हड्डी का काम करता है। आज 50 कन्याओं के अंदर संस्कार पीढ़ी का निर्माण कर रही है, जो आगे चलकर समाज और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देगी।