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खेतां दी मुक गई राखी, ओ जट्टा आई बैसाखी…

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता| गुरदासपुर

बैसाखी त्योहार की मान्यता है कि इस दिन किसान अपनी गेहूं की पकी हुई फसल काट कर मंडी में बेच कर फ्री हो जाता है। इस दिन गांवों के लोग एक जगह पर लगने वाले मेले में जाते हैं तथा खरीददारी करते हैं। इसी तरह गुरदासपुर क्षेत्र में पंडोरी महंता में भी बैसाखी के संबंध में 3 दिवसीय भारी मेला लगाया जाता है जिसमें कई प्रकार की दुकानें सजाई जाती हैं। आस पास के गांवों के लोग पूरा साल इस दिन का इंतजार करते हैं। पिंडोरी धाम एक ऐसा ऐतिहासिक स्थान है जिसका इतिहास 550 वर्ष पुराना है।

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी प्राचीन श्री पंडोरी धाम में बैसाखी का पावन उत्सव बड़ी श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इस दौरान सुबह 11 बजे महंत रघुबीर दास महाराज ने चांदी की पालकी में विराजमान हो पूरे दरबार की परिक्रमा की, जिस दौरान भक्तजनों ने बारी-बारी उनकी पालकी को उठाकर उन पर फूलों व पैसों की वर्षा कर कीर्तन करते हुए महंत जी का आर्शीर्वाद प्राप्त किया, जिसके बाद उन्होंने अपने सेवकों के साथ पवित्र सरोवर में जाकर स्नान किया। इसके उपरांत दरबार में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तजनों ने श्रद्धापूर्वक भोजन ग्रहण किया। इस दौरान असंख्य भक्तजनों ने सरोवर में आस्था की डुबकी लगाई। मेले में खाद्य पदार्थों व खिलौनों की दुकानें बड़ी सुंदर ढंग से सजी हुई थी। जहां बच्चों ने खिलौनों को खरीदा, वहीं महिलाओं ने भी खूब खरीददारी की। इसके अलावा मेले में लगाए गए अनगिनत झूलें मेले की शोभा बढ़ा रहे थे।

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