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सरकारी नशा छुड़ाओ केंद्र में 14 में से 6 रोगी बचे, बाकी घर को लौटे

3 वर्ष पहले
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इलाज का समय 32 दिन, तो फिर 4-4 साल तक रखने के क्या थे कारण

भास्कर संवाददाता | गुरदासपुर

शनिवार को प्राइवेट नशा छुड़ाओ केंद्र से रिहा करवाए युवकों ने कहा कि जब जज साहिब ने वहां पर चेकिंग की तो उन्हें पता चला कि हम सब रोगियों के साथ नशा छुड़ाओ केंद्र में कैसा बरताव किया जाता है। इसके बाद उन्होंने सेहत विभाग की टीम को वहां पर बुलाया, सारा रिकार्ड जब्त किया, केंद्र भी सील किया, लेकिन केंद्र के प्रबंधकों के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्यों हमारे साथ जानवरों से बदतर सलूक करने वालों को इसी तरह छोड़ दिया गया। हमारी मांग है कि उनके खिलाफ मामला दर्ज कर सजा दी जाए, ताकि उसे पता चल सके कि किसी के साथ ऐसा बरताव करने की सजा क्या होती है।

गौर हो कि शनिवार को 15 युवकों को नवजीवन नशा छुड़ाओ केंद्र से रिहा करवाकर सरकारी अस्पताल के नशा छुड़ाओ केंद्र में शिफ्ट किया गया था। इनमें से 3 युवकों को उनके परिजन उसी समय अपने साथ ले गए थे, जबकि एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। वहीं, 11 युवकों में से 3 को शाम के समय अस्पताल से उनके परिजन ले गए, जबकि 5 युवक रविवार सुबह अपने घरों को चले गए। इस समय केंद्र में सिर्फ 6 युवक ही बचे हैं, जिनमें से 2 मानसिक तौर पर बीमार हैं। अस्पताल के केंद्र में बैठे युवकों ने बताया कि जब घर वाले किसी को प्राइवेट केंद्र में भर्ती करवाने आते थे, तो उनसे बहुत अच्छा बरताव किया जाता था, लेकिन जैसे ही घर वाले वहां से जाते थे तो वहां पर कोई भी बिना गाली के बात नहीं करता था।

नशा छुड़ाओ केंद्र में रोगियों को गैरकानूनी ढंग से रखते थे प्रबंधक, हर महीने 25 हजार लेकर 8 हजार की देते थे रसीद

केंद्र में हो चुकी है हत्या व सुसाइड

युवकों ने बताया कि अमृतसर का रहने वाला एक निहंग सिंह केंद्र में भर्ती हुआ था, जो भांग का नशा करने का आदी था। एक दिन जब ऊपर बाथरूम में एक युवक नहा रहा था तो उक्त निहंग सिंह ने उसके सिर पर चारपाई का पावा मारकर उसकी हत्या कर दी थी। इसके अलावा इनके जुल्म से तंग आकर एक युवक ने सुसाइड भी किया था। दोनों मामलों में क्या हुआ किसी को कुछ नहीं पता। जब भी किसी के परिजन मिलने आते हैं, तो उनसे थोड़ी बहुत बात करवाकर उन्हें भेज दिया जाता है और उनसे कहा जाता है कि इनका व्यवहार अभी ठीक नहीं है।

युवक बोले-एक साथ पीटते थे 6-6 लोग

युवकों ने बताया कि पहले वहां पर 25 रोगी थे। हमें बनाने के लिए एक समय में ढाई किलो चावल मिलते थे। लेकिन जब वहां पर 30 रोगी हो गए तो चावल कम पड़ने लगे। उन्होंने बताया कि अगर उनके सामने कोई मुंह खोलता, तो एक व्यक्ति को 6-6 लोग मिलकर पीटते थे। अगर किसी को भूख लग जाती तो पहले उसे भूख बढ़ाने की गोली खिलाई जाती थी ओर बाद में खाना दिया जाता था। गोली का असर होने पर वो रोगी फिर सारा दिन पेट दर्द से तड़पता रहता था। ऐसेे जुल्म कर हमें परेशान किया जाता रहा है।

मानसिक रोगियों में 24 घंटे बाद भी खौफ

रिहा करवाए रोगियों में से दो मानसिक रोगी भी हैं, जो कि इलाज दौरान ही बीमार हुए हैं। उनमें केंद्र के प्रबंधकों का इतना डर भर चुका है कि वह किसी के आने पर भी खड़े हो जाते हैं और हाथ जोड़कर यही बोलते हैं कि हमने किसी से कुछ नहीं कहा, हमने कुछ नहीं किया। रविवार को जैसे ही अस्पताल पहुंचकर रोगियों से बात करनी चाही, तो कुर्सी पर बैठा पवन एकदम से खड़ा हो गया तथा हाथ जोड़कर कहने लगा कि मैंने किसी को कुछ नहीं कहा।

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