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शुगर बढ़ने से हुई समीर की मौत

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | गुरदासपुर

शनिवार की दोपहर सिविल जज सीनियर डिविजन कम सचिव जिला कानूनी सेवाएं अथारिटी राणा कंवरदीप कौर ने कलानौर रोड पर स्थित नवजीवन नशा छुड़ाओ में चेकिंग की थी। इस दौरान वहां भर्ती रोगियों का हाल देखकर व उनकी बातें सुनकर जज ने सेहत विभाग को उसे सील करने की सिफारिश की थी। केंद्र में भर्ती रोगियों में से 14 रोगियों को सरकारी अस्पताल में बने नशा छुड़ाओ केंद्र में शिफ्ट किया गया था, जबकि एक रोगी समीर चौधरी को इलाज के लिए इमरजेंसी में भर्ती करवाया गया था। इमरजेंसी में भर्ती करवाने के कुछ घंटे बाद ही उसका शव जीटी रोड पर पड़ा मिला। इस बात से सेहत विभाग सकते में आ गया।

सेहत विभाग की लापरवाही के कारण कुछ ही घंटे पहले अच्छी तरह बात करने वाला आदमी मर गया। समीर का पोस्टमार्टम कर शव वारिसों को सौंप दिया गया है, जबकि उसके परिजनों का कहना है उन्हें किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं करवानी है।

केंद्र में भर्ती समीर के साथियों ने बताया कि समीर शुगर का रोगी था तथा उसका खून भी गाड़ा था। इसके लिए केंद्र कर्मियों द्वारा उसे रोजाना खून पतला करने की 1 गोली व शूगर कंट्रोल करने के लिए इंजेक्शन लगाया जाता था, लेकिन पिछले 2 दिनों से न तो उसे गोली दी गई थी। हो सकता है कि जब सेहत विभाग ने उसे इमरजेंसी में शिफ्ट किया तो उसकी शूगर अधिक बढ़ गई हो, जिससे उसकी मौत हो गई। फिलहाल समीर के परिजनों द्वारा किसी भी कार्रवाई से इनकार किया जा रहा है, लेकिन यह सवाल अभी भी बरकरार है कि एक जज की सिफारिश पर जिस रोगी को सिविल में शिफ्ट किया गया उसकी किसी ने भी देखभाल नहीं की और न ही उस पर नजर रखी गई, जिसके चलते वह खुद ही अस्पताल से चला गया और सड़क पर अज्ञात व्यक्ति के रूप में पड़ा रहा।

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