तत्कालीन कमिश्नर ने टीएंडसीपी को लिखा था पत्र
ग्वालियर डीबी स्टार
तत्कालीन नगर निगम कमिश्नर अनय द्विवेदी ने शहर में भवन निर्माण की अनुमति देने में गड़बड़ी की शिकायतों के आधार पर जांच कमेटी बनाई थी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर चार भवन अधिकारियों का लाइसेंस निरस्त करने के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के पास प्रस्ताव भेजा था। प्रस्ताव के बाद टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने निगम के चार भवन अधिकारी महेंद्र अग्रवाल, पवन सिंघल, कीर्तिवर्धन मिश्रा व अजय पाल सिंह जादौन के भवन निर्माण संबंधी लाइसेंस निरस्त कर दिए थे। अनय द्विवेदी के हरदा कलेक्टर बनाए जाने के बाद ग्वालियर नगर निगम कमिश्नर के पद पर विनोद शर्मा आए और उन्होंने आते ही इन चारों अधिकारियों को फिर से भवन अधिकारी बना दिया। अब कमिश्नर ने इन चार अधिकारियों के साथ सत्येंद्र यादव, प्रदीप सिंह जादौन, प्रदीप वर्मा, सुरेश अहिरवार को भवन अधिकारी का लाइसेंस देने के लिए पत्र लिखा है।
केस-3
वर्तमान में जनसंपर्क अधिकारी मधु सोलापुरकर को नागरिकी पत्रिका न बांटने और नवसंवत्सर के मौके पर 22 लाख के विज्ञापन बिना रिलीज ऑर्डर के जारी करने के मामले में जांच का सामना करना पड़ा। तत्कालीन निगमायुक्त अनय द्विवेदी ने जुुलाई 2016 उन्हें अपने मूल विभाग जनसंपर्क में भेजा था, अब कमिश्नर विनाेद शर्मा ने जुलाई 2017 ने उन्हें फिर से पीआरओ बना दिया।
केस-4
लिपिक लोकेंद्र चौहान ने निगम की दुकानों का नियम विरुद्ध तरीके से ट्रांसफर और नामांकन किए। इससे निगम को लगभग 50 लाख रुपए से अधिक के आर्थिक नुकसान का अनुमान था। जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन नगर निगम कमिश्नर अनय द्विवेदी ने मार्च 2017 में निलंबित किया था, लेकिन कमिश्नर विनोद शर्मा ने अक्टूबर 2017 में बहाल कर दिया।
केस-5
अकाउंट ऑफिसर रामकिशोर गुप्ता पर आरोप था कि बिना किसी सक्षम स्वीकृति के एक भृत्य 1.98 करोड़ रुपए एडवांस दिए थे, जबकि किसी भृत्य को एडवांस देने का प्रावधान ही नहीं था। इन्हें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति दे दी गई।