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ग्वालियर ऑब्सटेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी की सीएमई में दिल्ली के डॉ. शुभम गर्ग ने कहा

3 वर्ष पहले
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स्तनपान कराने से कम होता है ब्रेस्ट कैंसर का खतरा

गॉग्स की सीएमई में जानकारी देते एक्सपर्ट।

चार स्टेज में आंकड़ा

स्टेज-1 - 100 फीसदी इलाज संभव

स्टेज-2- 95 फीसदी इलाज संभव

स्टेज-3- 56 फीसदी इलाज संभव

स्टेज-4- 16 फीसदी इलाज संभव

हर तीन में से एक महिला होती है रिस्क जोन में

डॉ. गर्ग ने कहा कि भारत में 100 कैंसर के रोगियों में से 52 महिलाएं और 48 पुरुष कैंसर से पीड़ित हैं। इन महिलाओं में 14 ब्रेस्ट कैंसर की गिरफ्त में हैं। रोजाना हर 3 में से एक महिला पर ब्रेस्ट कैंसर का खतरा रहता है। इसके पीछे कारण है कैंसर के प्रति उनमें जागरूकता का न होना। इसलिए हमें जागरूकता अभियान भी चलाने होंगे।

तीन स्तर पर होती है कैंसर की जांच

सेल्फ एक्जामिन | महिलाओं को ब्रेस्ट का सेल्फ एक्जामिन करना चाहिए। फिर चाहे उन्हें कैंसर की संभावना हो या नहीं। यदि ब्रेस्ट में छोटी सी भी गांठ दिखती है, तो वे तत्काल अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

मेमोग्राफी | डॉक्टर्स, महिलाओं में एक्स-किरणों की सहायता से ब्रेस्ट का चेकअप करते हैं। उन्हें कोई गांठ दिखती है तो छोटी सर्जरी से ठीक किया जा सकता है।

ब्रेस्ट स्केनिंग | ब्रेस्ट स्केनिंग मशीन की मदद से ब्रेस्ट को स्केन किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में 5-7 मिनट का समय लगता है। यह पूरी तरह से सुरक्षित है।

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