ग्वालियर | बिना करे तो हल्का भार नहीं होता है, रुक कर मंजिल पर अधिकार नहीं होता है। इन पंक्तियों के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई कवि जयंती अग्रवाल ने। साहित्य साधना संसद की काव्य गोष्ठी शनिवार को सनातन धर्म मंदिर के राधा कुटीर में हुई। अध्यक्षता डॉ. कृष्णमुरारी शर्मा ने की। मुख्य अतिथि मुजफ्फरपुर के गीतकार डॉ. संजय पंकज रहे। संचालन कादंबरी आर्य ने किया। इस अवसर पर पुष्पा सिसौदिया, डॉ. उर्मिला त्रिपाठी, कमलेश कैस ग्वालियरी, राजकिशोर वाजपेयी सहित अन्य कवियों ने रचना पाठ किया।
उजड़े - उजड़े गांव शहर हैं, चलती फिरती लाशें, कुछ पागल अब भी मरघट में जीवन- मूल्य तलाशें।
- डॉ. संजय पंकज
प्रश्नों के भय से सकुचाते उत्तर, बेहद बेशर्म हो गए हैं अर्थ। - मुरारीलाल गुप्ता, गीतेश
जड़ को चाट रहे हैं दीमक, शाख काटते नित माली, ऐसे में बचाना है, अपनी बगिया की हरियाली।
- लक्ष्मण कानडे
साथी सोच समझ कर चल, भैया सोच समझ कर चल, आज करी जो जल-बर्बादी, क्या होगा फिर कल।
- अनिल गुप्ता