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जूनियर की शरण में आए सीनियर

3 वर्ष पहले
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उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ में जो कभी सीनियर थे वो सेवा से त्याग पत्र देकर भ्रष्टाचार पर लगाम कसने वाली संस्था में है और अब जूनियर की शरण में समर्पित होते जा रहे हैं। जूनियर ने कार्य विभाजन में ग्वालियर, इंदौर, भोपाल जैसे बड़े जिलों से उन्हें बेदखल कर दिया। खासमखास विधि अधिकारियों को भी चलता कर दिया। पुलिस अफसरों की भी लिस्ट तैयार है। उन्हें भी जल्द खो कर दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में पहले मोर्चा खोल चुके सीनियर अपने जूनियर को उम्र में बड़ा बताकर बड़े भाई के तौर पर स्वीकारते हुए शरण में आ गए हैं। अब दिल से किसने किसे अपनाया है, ये पता लगना बाकी है।

दबाव में अफसर

जीआर मेडिकल काॅलेज में चिकित्सा शिक्षकों की भर्ती में अफसर जरूरत से ज्यादा दबाव में हैं। पहले आरएसएस के दवाब में मंत्रियों ने कमल की डिग्री पूरी हुए बिना असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती पर अडंगा लगाया। जैसे-तैसे विज्ञप्ति जारी हुई तो भर्ती के प्रभारी डा. अनुभव गर्ग को प्रोफेसर बनाने के लिए संशोधन की तैयारी कर ली। हालांकि तीन माह बाद प्रोफेसर के लिए न्यूरोलाॅजी के डाॅ. दिनेश उदैनिया पात्र होंगे इसलिए उन्हें पदोन्नत किया जा सकता है लेकिन उनकी आड़ में दो से तीन साल में प्रोफेसर के पद के लिए पात्र होने वालों के लिए भी पद रिजर्व रखने की तैयारी की जा रही है। अनुभव का पुराना अनुभव इसमें काम आ रहा है। ऐसे में मेडिसन व सर्जरी सहित अन्य विभागों में पदोन्नति के पात्र डाक्टरों की सुध कोई नहीं ले रहा है। । घुमक्कड़श्री

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