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एक मंच पर गुरु-शिष्य ने गाए भजन

3 वर्ष पहले
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एक मंच साझा करते गुरु और शिष्य। गायन की यह जुगलबंदी बेहट में देखने को मिली। मंगलवार को यहां राजा मानसिंह तोमर म्यूजिक एंड आर्ट यूनिवर्सिटी की ओर से संगीत सभा आयोजित की गई। सबसे पहले यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. लवली शर्मा ने गायन प्रस्तुत किया। गीत के बोल सा से सागर की लहरें थे।

इसके बाद पूर्वा निगुड़कर ने भगवान मेरे ईशू..., ऋषि द्विवेदी ने मानो तो मैं गंगा मां हूं..., शशांक शिवहरे ने मैं नहीं मेरा नाम नहीं..., सागर गुप्ता ने जैसा सोचोगे तुम वैसा बन जाओगे..., गौरव कुमार ने चरणों में अपने रहने दे मुझको... और शुभम बहादुर ने श्याम सखा तू है नैनो का उजियारा... भजनों की प्रस्तुति दी। इस दौरान कुलपति ने स्टूडेंट्स को स्वर और अलंकारों का अभ्यास कराया। साथ ही छात्राओं के सवालों के जवाब भी दिए।

Musical ‌Event

बेहट में हुई संगीत सभा के बाद छात्रों को स्वर और अलंकारों के बारे में बताया गया।

इन्होंने भी सुनाए भजन

कार्यक्रम में रिषभ सैनी ने मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊं... भजन से दूसरी सभा की शुरुआत की। इसके बाद वंशिका ने यशोमती मैया से बोले नंदलाला... और भूमिका ने तुम्ही हो माता-पिता तुम्ही हो... भजन गाया। उनके साथ हारमोनियम पर शुभम बहादुर और तबले पर तेजप्रकाश विश्वकर्मा ने संगत की।

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