ईश्वर की भक्ति बचपन से होती है, पचपन से नहीं: गुंजन वशिष्ठ
ग्वालियर| ईश्वर की भक्ति बचपन से ही होती है, पचपन से नहीं। इसलिए जरूरी है कि माता-पिता बच्चों को बचपन से ही ऐसे संस्कार दें, जिससे उनका झुकाव ईश्वर की भक्ति की ओर हो। ईश्वर की भक्ति के लिए बुढ़ापे का इंतजार नहीं करना चाहिए। यह बात राजा बाक्षर मंदिर में चल रही भागवत कथा के तीसरे दिन शनिवार को सुश्री गुंजन वशिष्ठ ने ध्रुव चरित्र की कथा सुनाते हुए कही। उन्होंने कहा कि ईश्वर की सरल प्राप्ति का साधन बचपन में ही होता है। बचपन में मनुष्य राग, द्वेश, लोभ जैसी विकारों से दूर रहता है। उसके सरल व्यवहार के कारण ईश्वर की प्राप्ति उसे जल्द हो जाती है।