गोपाचल आराधना- आस्था का केंद्र
गोपाचल तीर्थ पूरे विश्व की सांस्कृतिक धरोहर है। गोपाचल पर्वत पर स्थापित बहुमूल्य प्रतिमाएं धर्म संस्कृति की पहचान है। भगवान पार्श्वनाथ के दर्शन करने मात्र से मनुष्य के दुख दूर हो जाते हैं। विश्व में गोपाचल जैसा सिद्ध क्षेत्र नहीं है। यह विचार मुनिश्री विशोक सागर महाराज ने शनिवार को फूलबाग स्थित जैन तीर्थ सिद्ध क्षेत्र गोपाचल वंदना के दौरान व्यक्त किए।
मुनिश्री ने कहा कि मां पर बच्चे का सच्चा विश्वास रहता है। इसी प्रकार गुरु पर भी विश्वास करना चाहिए। गुरु भी आपके जीवन को ऊंचा उठाने के लिए उचित सलाह देते हैं। कर्म के कारण मनुष्य को जो परेशानी होती है वह गुरु की सलाह पर दूर हो जाती है। मुनिश्री ने कहा कि ईश्वर की पूजा में पवित्र भाव हों तो मुक्ति मिल जाती है। भावना में प्रखरता आने पर प्रभावना बन जाती है। मुनिश्री ने बताया कि सद् गुरु से मार्गदर्शन पाकर अपने जीवन को अंधकार से दूर कर प्रकाश की ओर ले जाएं। व्यक्ति अपने आचरण, सोच, प्रवृति एवं व्यवहार से व्यक्तित्व बनाता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को धर्म परिवर्तन के लिए नहीं हृदय परिवर्तन के लिए प्रयास करने चाहिए।