मजबूत और न डिगने का भाव पत्रकािरता में जरूरी
खबर पालिका लोकतंत्र का हृदय है, जो उसमें 24 घंटे धड़कता है। एक पत्रकार में सब कुछ खोकर भी निष्पक्ष होने का साहस होना चाहिए। मजबूत और न डिगने का भाव पत्रकारिता में जरूरी है। नैतिकता का पतन जो नेताओं में देखा जाता है, अब कई बार पत्रकारों में भी देखा जाने लगा है, इससे दूर रहना ही बेहतर है। यह बात वरिष्ठ पत्रकार वेदप्रताप वैदिक ने कही। वे शनिवार को आईटीएम यूनिवर्सिटी की एडिटर्स कॉन्क्लेव में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आज भाषा पर संकट है, अगर भाषा नष्ट हुई तो संस्कृति नहीं बचेगी। इसलिए आप लोग हस्ताक्षर हिंदी में ही करें। इससे पहले विषय प्रवर्तन यूनिवर्सिटी के चांसलर रमाशंकर सिंह ने किया।
कॉन्क्लेव में विचार रखते वेदप्रताप वैदिक।
इन्होंने रखे विचार
कॉन्क्लेव में वरिष्ठ पत्रकार प्रंजॉय गुहा ठाकुरता, एनके सिंह, प्रियदर्शन, विजय क्रांति और श्याम किशोर सहाय ने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर आईटीएम यूनिवर्सिटी के एमडी डॉ. दौलत सिंह चौहान, कुलपति डॉ. केके द्विवेदी सहित अन्य लोग मौजूद रहे। संचालन जयंत तोमर ने किया। अंत में सभी वक्ताओं का सम्मान किया गया। इस मौके पर पत्रकारिता विभाग के स्टूडेंट्स मौजूद रहे।