पिता की रिकॉर्डेड आवाज पर दिखाईं शिव की 12 मुद्रा
भरतनाट्यम दो भाग में होता है, पहला शुद्ध नृत्य और दूसरा अभिनय। भरतनाट्य पहले मंदिरों में किया जाता था फिर यह राजदरबारों में आया। अंग्रेजों के समय इस पर प्रतिबंध भी लगा। यह जानकारी अंतरराष्ट्रीय नृत्यांगना डॉ. स्नेहा चक्रधर ने दी। शनिवार से तानसेन कला वीथिका में शुरु हुई दो दिवसीय भरतनाट्यम वर्कशॉप में उन्होंने
रुद्राष्टकम की 30 मिनट की प्रस्तुति दी। उन्होंने पिता अशोक चक्रधर की आवाज में रिकॉर्डेड शिव स्तुति पर भरतनाट्यम किया। इस दौरान एक खंड में शिव की 12 मुद्राओं को पेश किया। डॉ. स्नेहा ने खंड गति ताल में रुद्राष्टकम से शुरुआत की। यह राग मालिका में निबद्ध थी। इसके बोल थे नमामि शमीशान निवार्ण रूपं...। इसके बाद उन्होंने राग मांड और आदि ताल में मीरा भजनों पर प्रस्तुति दी। उन्होंने राग हंसध्वनि पर आधारित निंदा स्तुति पर परफॉर्म किया। इसके बाद अंत राग रागेश्री और खंड ताल में निबद्ध तिल्लाना से किया। इससे पूर्व तिरुपति रंग सृष्टि के ग्रुप ने भी गणेशवंदना प्रस्तुत की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राजा मानसिंह तोमर म्यूजिक यूनिवर्सिटी के फाइनेंस कंट्रोलर अजय शर्मा, संस्था के डायरेक्टर एनके झा व कथक डांसर डॉ. अंजना झा रहीं।
प्रस्तुति के दौरान नृत्यांगना स्नेहा ने हर मुद्रा को बारीकी से समझाया भी
रुद्राष्टकम
इसमें शिव का डमरू, त्रिशूल, गंगा, चंद्रमा, बाघंबर और गले में सर्प माला को हस्तमुद्राओं से प्रदर्शित किया।
मीरा भजन | इसमें मीरा की दीवानगी को हाथों में खड़ताल की मुद्रा से दिखाया जाता है। उसके बाद भगवान श्रीकृष्ण का मीरा को दर्शन देना और कृष्ण के खड़े होने की मुद्रा को प्रदर्शित किया।
पिताजी की कविताओं पर परफॉर्म करना है पसंद
नृत्यांगना स्नेहा चक्रधर ने बताया कि पिताजी बचपन से मुझे एक कविता सुनाते थे। जिसके बोल थे चिड़िया की पहली उड़ान...। जब मैं पांच साल की थी, तब से ही मैंने इस कविता पर परफॉर्म करना शुरू किया। जो कि मुझे बेहद पसंद है, मैं कोशिश करती हूं कि जब भी स्टेज परफॉर्मेंस दूं। पिताजी की कविताओं पर परफॉर्म करूं। पिताजी ने यूएसए के एक स्टूडियो में मेरे लिए कविता पढ़ी और मैंने उसे रिकार्ड करवाया। बाद में बांग्लादेश के लोकसंगीत बाउल पर कंपोजीशन बनाई। मैं अक्सर इस कंपोजीशन पर नृत्य करती हूं और लोगों को इसकी बारीकियां भी बताती हूं।
दो सत्रों में शुरू हुई वर्कशॉप
कार्यक्रम में दो सत्रों में वर्कशॉप हुई। पहले सत्र में नृत्यांगना स्नेहा चक्रधर ने स्टूडेंट्स को बॉडी कंडीशनिंग कराई। इसमें शरीर को भरतनाट्यम के लिए लचीला बनाया जाता है। इसमें पैरों का काम सबसे ज्यादा होता है। इसलिए पैरों की स्ट्रेचिंग कराई गई। इसके बाद अभ्यास भी कराया गया।
अभिनय पक्ष भी बताया
दूसरे सत्र में भरतनाट्यम नृत्यांगना अरूपा लाहिरी ने प्रतिभागियों को अभिनय पक्ष की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भरतनाट्यम में नृत्य के साथ अभिनय पक्ष मजबूत होना चाहिए। इसके लिए आपको अभ्यास करना होगा। आप रोजाना जितना अभ्यास करेंगे, नृत्य पर पकड़ उतनी ही बेहतर बनेगी।
निंदा स्तुति | इस पेशकश में कानों पर हाथ रखकर निंदा करने की भंगिमाओं को प्रस्तुत किया। इसमें उन्होंने 5 से 6 मुद्राएं दिखाईं और इनका महत्व भी बताया।