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चार साल में बने मकानों में निगम कराएगा वाटर हार्वेस्टिंग

3 वर्ष पहले
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शहर में पिछले चार सालों में बनाए गए भवनों में अब नगर निगम वाटर हार्वेस्टिंग कराएगा। इस अवधि में जारी की गई भवन निर्माण मंजूरियों की फीस के साथ निगम ने वाटर हार्वेस्टिंग की राशि के रूप में 1.91 करोड़ रुपए की राशि जमा कराई है। यदि किसी भवन में वाटर हार्वेस्टिंग के दौरान अधिक राशि खर्च होती है तो वह राशि भवन स्वामी से ही दिलवाई जाएगी। यह निर्देश निगम कमिश्नर विनोद शर्मा ने सोमवार को बाल भवन में आयोजित बैठक के दौरान दिए। ऐसे भवन स्वामी जिन्होंने किसी कारण से वाटर हार्वेस्टिंग की राशि जमा नहीं कराई है, वे विभिन्न संस्थाओं के जरिये यह काम करवा सकते हैं।

कमिश्नर ने कहा कि मानसून की आमद से पहले वाटर हार्वेस्टिंग का काम युद्धस्तर पर चलाया जाए। इसके लिए निगम अमले के अलावा इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्रों का दल बनाकर लोगों को हार्वेस्टिंग के संबंध में जानकारी दी जाएगी। श्री शर्मा ने भवन अधिकारियों को निर्देश दिए कि आगे से भवन निर्माण अनुमति जारी करने के साथ यह भी निर्देश दिए जाएं कि काम पूरा होते ही पूर्णता प्रमाण पत्र भी लें, नहीं लेने पर ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन्होंने निर्माण पूरा करा लिया है, वे वाटर हार्वेस्टिंग के प्रूफ दिखाकर पूर्णता प्रमाण पत्र ले सकते हैं।

जमा राशि के अलावा आने वाला खर्च भवन स्वामी से दिलवाएगा निगम

जागरूक करने के लिए शिविर

लोगों को वाटर हार्वेस्टिंग के प्रति जागरूक करने के लिए शहर के प्रमुख स्थानों पर तीन-तीन दिन के शिविर लगाए जाएं। श्री शर्मा ने ब्रांड एंबेसडर भूपेंद्र जैन को निर्देश दिए कि शहर के 6 प्रमुख स्थानों पर सुबह के समय शिविर लगाकर लोगों को वाटर हार्वेस्टिंग के संबंध में जानकारी दी जाए। शुरुआत में जीवाजी विश्वविद्यालय, आनंद नगर, दीनदयाल नगर, तानसेन मकबरा, छत्री एवं कैंसर हॉस्पिटल में शिविरों का आयोजन किया जाएगा।

किस वर्ष में कितनी मंजूरी

वर्ष मंजूरी

2013-14 540

2014-15 531

2015-16 342

2016-17 395

कुल निर्माण 1808

चार मंजिला से ज्यादा के भवन में री साइकिलिंग प्लांट

कमिश्नर ने भवन अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि चार मंजिल से अधिक की मल्टी स्टोरी बिल्डिंग की निर्माण अनुमति देने के साथ निर्माणकर्ता से सर्विस प्लान लें। ऐसे भवन में वाटर री-साइकिलिंग का प्लांट अनिवार्य रूप से लगवाया जाए। ऐसा न करने पर निर्माण अनुमति निरस्त कर दी जाए।

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