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सीखने के बजाए सिर्फ सैर सपाटा

3 वर्ष पहले
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ग्वालियर डीबी स्टार

ग्वालियर के किसानों को नीदरलैंड की राजधानी एम्सटरडम और इजराइल के शहर तेल अवीव ले जाया गया था, लेकिन खेती के हिसाब से भारत में इन दोनों देशों के मुकाबले अलग परिस्थितियां हैं। एम्सटरडम में खेती के लिए दलदली जमीन का इस्तेमाल किया जाता है। समुद्र किनारे बसा होने के कारण वहां के किसान पहले पानी की टेस्टिंग कर लेते हैं। इसके बाद इस पानी के हिसाब से ही वे फसल का चयन करते हैं। दूसरी तरफ इजराइल में ज्यादा गर्मी पड़ती है। ऐसे में वहां ग्लास हाउस में तापमान नियंत्रित कर फसल उगाई जाती है, लेकिन ग्वालियर में ऐसा करना संभव नहीं है। यहां सिर्फ पॉली हाउस कॉन्सेप्ट ही आया है। इन देशों में घूमकर आए किसानों का साफ कहना है कि यहां ग्लास हाउस बना तो लेंगे, लेकिन उन्हें सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती है।

इन देशों में भेजे जा रहे हैं किसान

मुख्यमंत्री किसान विदेश अध्ययन यात्रा योजना के तहत ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, नीदरलैंड, इजराइल, स्पेन, फ्रांस, दक्षिण काेरिया और चीन जैसे देशों में भेजा जा रहा है, लेकिन वहां की कृषि तकनीक भारत के मुकाबले बहुत भिन्न हैं। इसके अलावा इन देशों की भौगोलिक परिस्थितियां भी अलग हैं।

इन किसानों का हुआ है चयन

ग्वालियर जिले से कुल सात किसानों का चयन किया गया है। इसमें रजनी, केदार सिंह, राम सिंह का चयन ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड की यात्रा के लिए, देवसिंह व सरजीत सिंह का चयन एम्स्टरडम और तेल अवीव की यात्रा के लिए और हरिकंठ सिंह का चयन स्पेन और फ्रांस देश की यात्रा के लिए किया गया है।

विदेशी तरीकों का उपयोग मुश्किल

 हमें इजराइल और नीदरलैंड ले जाया गया था। वहां की तकनीक का इस्तेमाल यहां करना व्यवहारिक रूप से बहुत मुश्किल है। वहां ग्लास हाउस बनाकर खेती की जाती है, लेकिन यहां ग्लास हाउस को सुरक्षित रखना ही बहुत बड़ी चुनौती है। हरिकंठ सिंह, विदेश से लौटे किसान

तीन किसान और जाएंगे

 मुख्यमंत्री विदेश अध्ययन यात्रा योजना के तहत जिले से अभी पांच किसानों को विदेश यात्रा पर भेजा गया है। अब अगले चरण के लिए तीन अन्य किसानों का भी चयन किया जाएगा। अभी मैं एक कार्यक्रम में हूं, इस कारण आपसे ज्यादा बात नहीं कर पाऊंगा। डॉ. आनंद बड़ोनिया, उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास

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