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नाटक में किरदार को समझने के लिए बढ़ाना होगा सोच का दायरा: मजूमदार

3 वर्ष पहले
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नाटक में खुद का कैरेक्टर बेहतर ढंग से समझने के लिए ‘यदि’ पर फोकस करना होगा। इससे हमारी सोच का दायरा बढ़ेगा और हम अपनी भूमिका आसानी से तय कर पाएंगे। अभिनय के साथ भाव-पक्ष पर भी यह बात लागू होती है। यह बात थिएटर एक्सपर्ट सचिन मजूमदार ने आर्टिस्ट कंबाइन ग्रुप की ओर से शुरू हुए रंग शिविर में कही। उन्होंने प्रतिभागियों को बताया अभिनय से पहले हमें फाइव डब्ल्यू, एच का फॉमूर्ला अपनाना चाहिए। इसमें व्हेन, व्हाय, व्हेयर, विच, व्हाट और हाऊ शामिल है।

अब फिल्मों के हिसाब से सीखना पड़ता है अभिनय

एक्सपर्ट ने कहा कि अभी तक हम लोग भरतमुनि के नाट्य शास्त्र के हिसाब से अभिनय की बारीकियां समझते थे। अब रियलिस्टिक अभिनय पर जोर दिया जाता है। फिल्मों में जो भी एक्टिंग होती है, वह रियलिस्टिक होती है। इसलिए हम लोग वैसे ही कलाकार तैयार करते हैं, जो फिल्माें में अपना कॅरियर बना सकें।

शिविर में युवाओं ने संवाद बोलने का अभ्यास किया

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