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लक्ष्मीबाई समाधि स्थल से लैंपपोस्ट गायब बैजाताल की दीवार टूटी, चोरी हुए पौधे

3 वर्ष पहले
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शहरवासी चाहते हैं कि शहर के ऐतिहासिक स्थल सुंदर बनें और हरियाली भी रहे। लेकिन कुछ शरारती तत्वों को ऐतिहासिक स्थलों की सुंदरता रास नहीं आ रही है। उन्होंने बैजाताल, रानी लक्ष्मीबाई समाधि स्थल और इटालियन गार्डन में चल रहे कार्यों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है। लक्ष्मीबाई समाधि स्थल पर लगे लैंप पोस्ट से लैंप निकालकर ले गए। बैजाताल में तो पौधों को भी नहीं छोड़ रहे हैं। यहां पर दीवार के हिस्सों को भी तोड़ दिया गया है।

केन्द्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना (हैरिटेज सर्किट) में ऐतिहासिक स्थल, मंदिर और किले पर काम किए जा रहे हैं। मप्र पर्यटन विकास निगम इन कामों को ठेकेदारों से करा रहा है। ये सभी काम पूरे होने को हैं। अब सिर्फ फिनिशिंग का काम चल रहा है। पर्यटन निगम ने कम पानी में और जल्द लगने वाले पौधों को कोलकाता से मंगाया है। इन दिनों बैजाताल और रानी लक्ष्मीबाई समाधि स्थल पर पौधे और घास लगाने का काम चल रहा है। यहां काम करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि अभी पौधे जमीन में जमे भी नहीं कि कोई निकालकर ले गया। 800 से ज्यादा करीब 40 हजार रुपए कीमत के पौधे चोरी हो चुके हैं। इन पौधों की कीमत 50 से 500 रुपए तक है। चोरी होने से बचाने के लिए पौधों को रानी लक्ष्मीबाई समाधि स्थल पर रखवा दिया गया है। इटालियन गार्डन में नए डिजाइन की बेंच लगना थी। उसका एक नमूना बनाकर इटालियन गार्ड में रखवाया गया था। शरारती तत्वों ने इसे भी नहीं छोड़ा। उसे भी तोड़ डाला है। अब पर्यटन निगम फिर से बेंच बनवाएगा।

थीम रोड को भी किया नष्ट: थीम रोड महल गेट से जेएएच चौराहे तक बनाई गई थी। यहां बेंच और लैंपपोस्ट आदि लगाए गए थे। इन्हें लोग निकालकर ले गए, लाल पत्थर की बेंच, लैंप पोस्ट आदि टूट चुकी हैं। इन पर दो करोड़ रुपए की राशि खर्च हुई थी।

लक्ष्मीबाई समािध स्थल पर लगे लैंपपोस्ट।

हां, पौधे और लैंप गायब हो गए

ऐतिहासिक स्थलों पर काम चल रहा है। बैजाताल से लोग कीमती पौधे ले गए हैं। लक्ष्मीबाई समाधि से लैंप पोस्ट गायब हो गया और इटालियन गार्डन में बैंच तोड़ दी गई है। हमने ठेकेदार को कहा है कि वह खुद सामान की रक्षा करे। राजीव श्रीवास्तव, कार्यपालन यंत्री पर्यटन

इनको करने की जरूरत

धरोहर को कैसे सुरक्षित बना सकते हैं?

हमें धरोहर को बचाने के लिए जागरूकता लाने की जरूरत है। ये कैसे लाई जा सकती है? सामाजिक संस्थाएं, छात्र संगठन और शहर के नागरिक खुद आगे जाएं, जैसे स्वच्छता को लेकर सब जागरूक हुए। ऐतिहासिक स्थल पर तोडफ़ोड़ कैसे रूक सकती है। जिस भी सरकारी एजेंसी पर ऐतिहासिक धरोहर की देखरेख का जिम्मा है, उसे वहां पर सीसीटीवी कैमरें लगवाना चाहिए।

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