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न्याय के देवता का तेल आैर तिल से अभिषेक, भक्तों ने निकाली पालकी

3 वर्ष पहले
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न्याय के देवता शनिदेव की जयंती पर मंगलवार को भक्तों ने तेल आैर तिल से शनिदेव का अभिषेक किया। 205 साल (30 मई 1813) के बाद मंगल के उच्चराशि में रहते हुए शनि जयंती का संयोग बना था। इसके चलते शनि मंदिरों में भक्तों की कतार लगी रही। भक्तों ने न्याय के देवता शनि देव को प्रसन्न करने के लिए तेल और तिल चढ़ाया। वहीं शनि मंदिर में रात से ही अभिषेक शुरू हो गए। ऐंती स्थित ऐतिहासिक शनि मंदिर में सुबह भक्तों ने शनि देव की पालकी भी निकाली।

ऐंती शनिश्चरा स्थित मंदिर में फूल बंगला सजाया गया। इसके बाद रात 12 बजे मंदिर के पुजारियों ने शनिदेव का अभिषेक किया। सुबह 9 बजे शनिश्चरा स्टेशन से मंदिर तक शनिदेव की पालकी निकाली गई। शनि की साढ़ेसाती और ढैया के प्रकोप से बचने के लिए मंदिर में बड़ी संख्या में पहुंचे भक्तों ने शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए पूजा अर्चना की। शनि मंदिर में सुबह से ही भंडारा शुरू हो गया, जो देर रात तक जारी रहा। शहर में दाल बाजार स्थित शनि मंदिर, बहोड़ापुर स्थित नवग्रह मंदिर, तारागंज स्थित शनि मंदिर और बालाजी धाम स्थित नवग्रह मंदिर में शनिदेव की भक्तों ने पूजा-अर्चना कर दशरथकृत शनि स्त्रोत का पाठ किया।

शनि जयंती पर जहां भक्तों ने शनिदेव की पूजा अर्चना की, वहीं हनुमान और शिव जी की उपासना भी की। शनि जयंती पर इस बार मंगलवार का योग रहा। साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, भौमवती अमावस्या और वट सावित्री व्रत का महासंयोग रहा। मंगल के उच्च राशि में रहते हुए शनि जयंती पर 205 साल पहले 30 मई 1813 में ऐसा ही संयोग बना था। उस समय भी मंगल केतु के साथ मकर राशि में और राहु कर्क राशि में था। बुध मेष राशि में था। इस साल शनि धनु राशि में वक्री रहा। 29 साल पहले भी शनि धनु राशि में था।

एेंती में फूलों से सजी शनि प्रतिमा। दूसरे चित्र में कटीघाटी स्थित शनि मंदिर में पूजन-अर्चन करते श्रद्धालु।

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