पेड़-पौधे, नदियां, समुद्र सब ईश्वर के अंग प्रत्यंग हैं। नदियां ईश्वर की नाड़ियां हैं और चंद्र व सूर्य नेत्र। यदि हम प्रकृति से खिलवाड़ करते हैं तो यह महापाप की श्रेणी में आता है। प्रकृति के साथ खिलवाड़ के दुष्परिणाम हम आज भुगत रहे हैं। यह बात लक्ष्मीगंज स्थित राधे गोविंद मेंशन में आयोजित भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक गुंजन वशिष्ठ ने कही।
लक्ष्मीगंज स्थित रामद्वारा में भागवत कथा आज से
लक्ष्मीगंज स्थित रामद्वारा में शनिवार से 25 मई तक श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन होगा। इससे पहले रोकड़िया हनुमान मंदिर से सुबह 8 बजे शोभायात्रा निकाली जाएगी। भक्तों को पुष्कर से आए संत अमृतराम महाराज कथा सुनाएंगे। कथा प्रतिदिन सुबह 8 से दोपहर 12 बजे तक होगी।
भवसागर से तारती है देवी भागवत कथा : संध्या
कलयुग में भागवत कथा के सुनने मात्र से ही मनुष्य भवसागर से पार हो जाता है। यह बात गणेश बाजार स्थित नगरकर श्रीराम मंदिर में आयोजित देवी भागवत कथा में भागवताचार्य संध्या ठाकुर ने कही। उन्होंने बताया कि मां भगवती ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश की जन्मदात्री हैं।